Wednesday, April 27, 2011

बिगड़ा भाग्य बनाता है यह पत्थर



तंत्र शास्त्र के अंतर्गत तांत्रिक क्रियाओं में एक ऐसे पत्थर का उपयोग किया जाता है जो दिखने में बहुत ही साधारण होता है लेकिन इसका प्रभाव असाधारण होता है। इस पत्थर को गोमती चक्र कहते हैं। गोमती चक्र कम कीमत वाला एक ऐसा पत्थर है जो गोमती नदी में मिलता है। गोमती चक्र के साधारण तंत्र उपयोग इस प्रकार हैं-

1- गोमती चक्र को होली के दिन थोड़ा सिंदूर लगाकर शत्रु का नाम उच्चारण करते हुए जलती हुई होली में फेंक दें। आपकी शत्रु भी मित्र बन जाएगा।

२- अगर कोई व्यक्ति होली के दिन 7 गोमती चक्र को सवा मीटर कपड़े में बांधकर अपने पूरे परिवार के ऊपर से ऊतारकर किसी बहते जल में फेंक दें तो यह एक तरह से आपके परिवार की तांत्रिक रक्षा कवच का कार्य करेगा।

3- चार गोमती चक्र को अगर रोगी के बिस्तर के साथ बांध दें तो कुछ ही दिनों में रोगी स्वस्थ होने लगेगा। रोगी के पूर्ण स्वस्थ होने पर इन्हें सुबह के वक्त पीपल के पेड़ के नीचे गाढ़ दें।

4- यदि 11 गोमती चक्र को पीले वस्त्र में लपेट कर तिजोरी में इस दिन रखें तो वर्ष भर तिजोरी भरी रहेगी।

5- तीन गोमती चक्र को जेब में रखकर किसी मुकद्में या प्रतियोगिता के लिए जाएं तो निश्चित ही सफलता मिलेगी।




Varinder Kumar
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किस्मत बदलना हो तो देवताओं को फूल चढ़ाएं



फूल ऐसी चीज है जिससे आप दुश्मन को भी दोस्त बना सकते हैं। हिंदू धर्म के अतंर्गत किए जाने वाले धार्मिक कार्यों में भी फूल का उपयोग होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार देवताओं को विशेष रंग के फूल चढ़ाने से वे जल्दी प्रसन्न होते हैं और भक्त की हर मनोकामना पूरी करते हैं। जानते हैं, किस देवता को कौन सा फूल चढ़ाएं- 

सूर्य

सूर्य प्रत्यक्ष देवता हैं । पूजा में सूर्य को लाल रंग के फूल चढ़ाने का विधान है। सूर्य को लालिमा प्रिय है। वे तेज के पुंज हैं। लाल रंग तेज का प्रतीक है। इसलिए सूर्य पूजा में लाल कनेर, लाल कमल, केसर या पलाश के फूल चढ़ाने चाहिए।

गणेश

भगवान गणेश प्रथम पूज्य हैं। इन्हें भी लाल रंग के फूल प्रिय हैं। लाल रंग मंगल का प्रतीक है। गणेश पूजा में तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए। दुर्वा अवश्य चढ़ाएं।

शिव

सफेद रंग के फूलों से शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं क्योंकि शिव कल्याण के देवता हैं। सफेद रंग शुभ्रता का प्रतीक है। भगवान शिव को आक व धतूरा के फूल भी अतिप्रिय हैं। शिव को केतकी और केवड़े के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए।

विष्णु

भगवान विष्णु पीतांबरधारी हैं। पीला रंग उन्हें प्रिय है। सामान्यतया विष्णु पूजा में सभी रंगों के फूल अर्पित किए जाते हैं लेकिन पीतांबरप्रिय होने के कारण पीले रंग का फूल अर्पित करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कमल का फूल भी भगवान विष्णु को बहुत प्रिय है।

देवी 

लक्ष्मी को लाल और पीले, दुर्गा को लाल और सरस्वती को सफेद रंग के फूल अर्पित करने की परंपरा है। लक्ष्मी सौभाग्य की प्रतीक है अत: उन्हें लाल रंग प्रिय है। विष्णु की पत्नी होने से वे पीले रंग के फूल से भी प्रसन्न होती हैं। दुर्गा शक्ति की प्रतीक है। लाल रंग शौर्य का रंग है। अत: वे लाल रंग के फूल से प्रसन्न होती हैं। सरस्वती ज्ञान और संगीत की देवी है। शुभ्रता की प्रतीक। उन्हें सफेद रंग के कमल पुष्प अर्पित किए जाते हैं।




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सभी समस्याओं का समाधान है पारद शिवलिंग



पारद को रसराज कहा जाता है। पारद से बने शिवलिंग की पूजा करने से बिगड़े काम भी बन जाते हैं। धर्मशास्त्रों के अनुसार पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का ही रूप है इसलिए इसकी पूजा विधि-विधान से करने से कई गुना फल प्राप्त होता है तथा हर मनोकामना पूरी होती है। इसे घर में स्थापित करने से भी कई लाभ हैं, जो इस प्रकार हैं-

- पारद शिवलिंग को घर में रखने से सभी प्रकार के वास्तु दोष स्वत: ही दूर हो जाते हैं साथ ही घर का वातावरण भी शुद्ध होता है।

- पारद शिवलिंग साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना गया है। इसलिए इसे घर में स्थापित कर प्रतिदिन पूजन करने से किसी भी प्रकार के तंत्र का असर घर में नहीं होता और न ही साधक पर किसी तंत्र क्रिया का प्रभाव पड़ता है।

- यदि किसी को पितृदोष हो तो उसे प्रतिदिन पारद शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए। इससे पितृदोष समाप्त हो जाता है।

- अगर घर का कोई सदस्य बीमार हो जाए तो उसे पारद शिवलिंग पर अभिषेक किया हुआ पानी पिलाने से वह ठीक होने लगता है।

- पारद शिवलिंग की साधना से विवाह बाधा भी दूर होती है।




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क्यों और क्या जरूरी है गर्भवती स्त्री के लिए?



गर्भवती स्त्रियों को शास्त्र पढऩे की सलाह दी जाती है क्योंकि यह उनके गर्भ में पल रहा शिशु के ज्ञान को बढ़ाता है। विज्ञान के अनुसार गर्भ में पल रहा शिशु भी सोचता-समझता और सभी आवाजों को सुनता भी है। इसीलिए नवजात शिशु में सुसंस्कार का विकास हो इस उद्देश्य से गर्भवती महिला को धर्म ग्रंथ पढऩा चाहिए।मां के गर्भ में शिशु बाहर हो रही सभी घटनाओं और आवाजों को मां के ही कान और दिमाग से भलीभांति समझता है। 

इसका सबसे अच्छा उदाहरण महाभारत में देखने को मिलता है। महाभारत में पांडव पुत्र अर्जुन जब उनकी पत्नी सुभद्रा को युद्ध में चक्रव्यूह भेदने का रहस्य सुना रहा रहे थे, तब सुभद्रा के गर्भ में पल रहा शिशु अभिमन्यु यह सब बातें ध्यान से सुन रहा था। जब अर्जुन चक्रव्यूह भेदने की आधी नीति बता चुके थे, उस समय सुभद्रा को नींद आ गई। जिससे अभिमन्यु चक्रव्यूह को भेदने का रहस्य तो जान गया परंतु चक्रव्यूह से वापस लौटने का रहस्य नहीं सुन सका क्योंकि उसकी मां सुभद्रा सो गई थी।

यही वजह महाभारत युद्ध में द्रोणाचार्य द्वारा रचित चक्रव्यूह में अभिमन्यु के वध का कारण बनी।इसी घटना से सिद्ध होता है कि यदि गर्भवती स्त्रियां अपनी संतान को सुसंस्कारी और गुणवान बनाना चाहती है तो उन्हें धर्म ग्रंथ पढऩे चाहिए और अच्छे बातें ही सोचना चाहिए।गर्भवती महिला जैसे विचार, जैसा खाना खाएगी, जैसा स्वभाव रखेगी, जो भी देखेगी-सुनेगी वैसे से ही सभी गुण उसकी संतान में आ जाते हैं।




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राशि अनुसार कौन सा पौधा खत्म करेगा सारे दोष...



अगर आपके घर में शांति नही है, हमेशा घर का कोई न कोई सदस्य बीमार रहता है, पैसा नहीं टिकता हो या जीवनसाथी से हमेशा अनबन होती रहती हो तो, आपको अपने राशि स्वामी को प्रसन्न करने के लिए अपनी राशि के अनुसार पेड़-पौधे लगाना चाहिए।



कौन सा पौधा है आपकी राशि का 

- मेष और वृश्चिक राशि वाले

 जातक को मंगल देव के लिए लाल फल-फूल वाले पेड़ पौधे लगाना चाहिए।

- वृष और तुला राशि के

 जातकों का राशि स्वामी शुक्र होता है इसलिए उन्हें सफेद फल-फूल वाले बड़े पेड़ पौधे  लगाने से लाभ होगा।

- कन्या और मिथुन राशि के

 जातक बुध ग्रह के अनुसार बिना फ ल और बिना फूल वाले छोटे पौधे लगा सकते है।

- कर्क राशि वाले लोगों का

 राशि स्वामी चंद्रमा होता है, इसलिए उन्हें अपने बगीचे में तुलसी या अन्य छोटे-छोटे औषधीय पौधे लगाएं और उसमें प्रतिदिन पानी दें।

- सिंह राशि वालों को

 लाल रंग के फूल वाले बड़े पेड़ या आकड़े का पेड़ लगाने से लाभ होगा।

- धनु और मीन राशि

 बृहस्पति देव की राशि है इसलिए इस राशि के जातकों को पीले फल वाले वज्रदंती या पीपल के पेड़ लगाना चाहिए।


- मकर और कुंभ राशि

 के व्यक्ति अपने राशि स्वामी शनि के अनुसार बिना फल-फूल वाले पेड़ पौधें लगाएं।



 सभी पेड़-पौधे पूरब दिशा में लगाने चाहिए। ग्रह के बुरे प्रभाव से बचने के लिए वायव्य कोण में यानी पश्चिम और उत्तर दिशा के बीच में भी कुछ बड़े पेड़ लगाए जा सकते हैं।




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Tuesday, April 26, 2011

कैसे होते हैं वे लोग जिनकी जन्म तारिख है 2, 11, 20 या 29



अंक 2 का मतलब है जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की 2, 11, 20, 29 हुआ हो, वे सभी अंक 2 वाले होते हैं। यह नंबर चंद्रमा का प्रतीक माना जाता है। चंद्रमा रचनात्मकता और कल्पनाशीलता का प्रतिनिधित्व करता है। चंद्रमा के सभी गुण अंक 2 वाले में विद्यमान रहते हैं।

चंद्रमा किसी भी एक राशि में ढाई दिन ही रुकता है अत: चंद्रमा की चाल बहुत तेज है। चंद्रमा हमारे मन को शत-प्रतिशत नियंत्रित करता है। अंक 2 वालों का ग्रह स्वामी चंद्र है इस वजह से यह लोग मन से चंचल होते हैं। चंद्र के प्रभाव के कारण यह लोग रोमांस से भरपूर होते हैं।

अंक ज्योतिष के अनुसार इस अंक के लोगों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मक क्षमता काफी अधिक होती है। हर कार्य को अच्छे और बेहद ही आकर्षक तरीके से करते हैं। हर पल नया करने के लिए लालायित रहते हैं। यह लोग काफी रोमांटिक स्वभाव के होते हैं और विपरित लिंग के प्रति बहुत अधिक आकर्षित होते हैं। अन्य लोग भी इनके व्यक्तित्व और कार्यशैली से इन पर मोहित हो जाते हैं। अधिकांशत: इस अंक के लोग शारीरिक दृष्टि से अधिक बलवान न होते हुए सामान्य शरीर वाले होते हैं।

यह लोग अधिक समय तक एक जैसा जीवन नहीं जी सकते, इन्हें परिवर्तन काफी पसंद होता है। इनके कई मित्र होते हैं। मन की चंचलता के कारण इनका मन अधिकांश समय अस्थिर ही रहता है। विपरित परिस्थितियों में बहुत जल्द दुखी हो जाते हैं और कई बार हिम्मत भी हार जाते हैं। ऐसे में इनमें आत्मविश्वास की कमी आ जाती है।

- इस अंक के लोगों के लिए रविवार, सोमवार और शुक्रवार काफी शुभ दिन होते हैं।

- इनके लिए हरा या हल्का हरा रंग बेहद फायदेमंद है। क्रीम और सफेद रंग भी विशेष लाभ देते हैं।

- लाल, बैंगनी या गहरे रंग इनके लिए अच्छे नहीं होते।

- अंक 2 वालों को मोती, चंद्रमणि, पीले-हरे रत्न पहनना चाहिए।




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