Monday, May 2, 2011

टैरो कार्ड्स : आपकी नाम राशि से, क्या हैं इस महीने का राशिफल



टैरो कार्ड्स इस महीने आपकी नाम राशि के लिए क्या कहते हैं? टैरो के अनुसार यह महीना आपके  लिए क्या लेकर आएगा? पढि़ए इस महीने का राशिफल..



मेष: मेष राशि के लिए मेजर अरकाना का चौथा कार्ड होता है। इस कार्ड के अनुसार  प्रेम संबंधों में तकरार होने की संभावना है। बुद्धि, विवेक से इस माह आप धन अर्जित करेंगे। विद्यार्थी, शिक्षक, अभिभाषक के लिए माह शुभ है। वाहनादि का प्रयोग सावधानीपूर्वक करें। आपका शुभ रंग: गुलाबी।

वृष: आपकी राशि के हाईरोफैंट कार्ड के अनुसार इस महीने आपके पराक्रम से अधिकारी प्रसन्न होंगे। नई जिम्मेदारी एवं उच्च पद की प्राप्ति होगी। बंधु-बांधवों का साथ मन को प्रसन्नता दिलाएगा। आय सामान्य होगी। आपका शुभ रंग: सफेद।

मिथुन: मेजर अरकाना का छठा कार्ड बताता है कि इस महीने आपको माता-पिता का सहयोग प्राप्त होगा। इस महीने में आपको अचानक धन प्राप्ति का योग भी बन सकता है। सभी कार्य समय पर पूर्ण होंगे। स्वास्थ्य अच्छा रहेगा। माह के अंत में पेट में तकलीफ हो सकती है। आपका शुभ रंग: हरा।

कर्क: टैरो में कर्क राशि को मेजर अरकाना का सातवाँ कार्ड दर्शाता है। इसके अनुसार वात, गैस, पेट की तकलीफ की समस्या होगी। आय में वृद्धि से उत्साह बना रहेगा। संतान की चिंता होगी। नौकरी में स्थानांतरण का योग है। आपका शुभ रंग: चमकीला, सफेद।

सिंह: आपकी राशि के स्ट्रैंथ कार्ड के अनुसार इस महीने में आपका स्वास्थ्य कमजोर हो सकता है। धार्मिक कार्यों में खर्च होने की संभावना है। शत्रुओं से परेशान हो सकते हैं। व्यापार मेें जोखिम भरे निर्णय न लें। आपका शुभ रंग: लाल।

कन्या: टैरों में मेजर अरकाना के अंतर्गत नौवें नंबर का कार्ड कन्या राशि को दर्शाता है। इसके अनुसार आपका अपने जीवन साथी के साथ मन-मुटाव हो सकता है। नए व्यापारिक अवसर प्राप्त होंगे। मन प्रसन्न होगा। मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। प्रमोशन होने का योग है। आपका शुभ रंग: हरा।

तुला: आपकी राशि का जस्टिस कार्ड बताता है कि वाहनादि का प्रयोग सावधानीपूर्वक करें। निर्माण कार्यों में व्यय का योग है। विवाह प्रस्ताव मिलेंगे। विद्यार्थी वर्ग को सफलता के लिए अधिक परिश्रम करना होगा।

आपका शुभ रंग: सफेद।

वृश्चिक: टैरो कार्ड के अन्तर्गत आपकी राशि को मून से जाना जाता है। इस कार्ड के अनुसार इस महीने में आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा। पुराने मित्रों से मुलाकात होगी। धार्मिक यात्रा का योग है। नई संपत्ति खरीदने का योग है। पराक्रम में वृद्धि होगी। आपका शुभ रंग: लाल।

धनु: टैरो में धनु राशि के लिए टैम्पेरेंस कार्ड होता है इस कार्ड के अनुसार पिता से आपकी अनबन होने की संभावना है। माता का स्वास्थ्य ठीक रहेगा। कार्य स्थल पर विरोध होने की संभावना है। आय सामान्य रहेगी। आपका शुभ रंग: पीला।

मकर: मकर राशि के जातकों को मेजर अरकाना के चौदहवें कार्ड से दर्शाया गया है। इस कार्ड के  अनुसार आय में अप्रत्याशित वृद्धि से आपका मन प्रसन्न रहेगा। न्यायालीन विवादों में सफलता मिलेगी। मकान, भूमि से लाभ होगा। संतान पक्ष से सुख समाचार प्राप्त होगा। आपका शुभ रंग: आसमानी।

कुंभ: टैरो में कुम्भ राशि वालों के लिए स्टार कार्ड होता है। व्यय में वृद्धि होगी।  आलस्य बना रहेगा। पठन-पाठन में रुचि बढेगी। धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा ले सकते हैं। इस माह आप स्वास्थ्य में कमजोरी महसूस करेंगे। आपका शुभ रंग: भूरा।

मीन: टैरो में मीन राशि के लिए माइनर अरकाना के पेज ऑफ कप नाम के  कार्ड का उपयोग होता है। इसके अनुसार इस महीने आपको मान-सम्मान की प्राप्ति होगी। अधिकारी आपके कार्य से संतुष्ट होंगे। आपको सहयोग मिलेगा। जीवन साथी से तनाव हो सकता है। नई जिम्मेदारी मिलने का योग बन रहा है। इस महीने आपका शुभ रंग: नीला।




Varinder Kumar
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Sunday, May 1, 2011

राशि के अनुसार करें मंत्र जप



भारतीय ज्योतिष के अनुसार सभी लोगों को 12 राशियों में बांटा गया है। हर राशि की अपनी कुछ विशेषता होती है। उसी के अनुसार उस राशि के स्वामी व मंत्र भी होते हैं। प्रत्येक राशि के व्यक्ति को उस विशिष्ठ मंत्र से ही सफलता मिलती है। राशि के अनुसार आपको किस देवता के मंत्र का जप करना चाहिए। इसके बारे में नीचे जानकारी दी गई है-

मेष: मेष राशि का स्वामी मंगल है। इस राशि के लोगों को ऊँ क्रां, क्रीं, क्रौं स: भौमाय नम: मंत्र का जप करना चाहिए।

वृष: वृषभ राशि का स्वामी शुक्र है। इस राशि के लोगों को ऊँ द्रां, द्रीं, द्रौं स: शुक्राय नम: मंत्र का जप करना शुभ होता है।

मिथुन: इस राशि का स्वामी बुध है। मंत्र: - ऊँ ब्रां, ब्रीं, ब्रौं, स: बुधाय नम:।

कर्क: इस राशि का स्वामी चंद्र है। मंत्र:- ऊँ श्रां, श्रीं, श्रौं स: सोमाय नम:।

सिंह: इस राशि का स्वामी सूर्य है। मंत्र- ऊँ ह्रां, ह्रीं, ह्रौं स: सूर्याय नम:।

कन्या: इस राशि का स्वामी बुध है। मंत्र ऊँ ब्रां, ब्रीं, ब्रौं, स: बुधाय नम:।

तुला- इस राशि का स्वामी शुक्र है। मंत्र- ऊँ द्रां, द्रीं, द्रौं स: शुक्राय नम:।

वृश्चिक- इस राशि का स्वामी मंगल है। मंत्र- ऊँ क्रां, क्रीं, क्रौं स: भौमाय नम:।

धनु: इस राशि के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। मंत्र- ऊँ ग्रां, ग्रीं, ग्रौं स: गुरवे नम:।

मकर: मकर राशि का स्वामी शनि है। मंत्र- ऊँ प्रां, प्रीं, प्रौं, स: शनैश्चराय नम:।

कुंभ: इस राशि के स्वामी शनि है। मंत्र- ऊँ प्रां, प्रीं, प्रौं, स: शनैश्चराय नम:।

मीन: इस राशि का स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। मंत्र-ऊँ ग्रां, ग्रीं, ग्रौं स: गुरवे नम:


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जब किस्मत न दे साथ, करें इस मंत्र का जप



मंत्रों में अपार शक्ति होती है। मंत्र के बल पर आप कुछ भी पा सकते हैं यहां तक कि अपना बिगड़ा भाग्य भी संवार सकते हैं। मंत्रों के शक्ति से जीवन की हर परेशानी का सामना आसानी से किया जा सकता है। ऐसा ही एक मंत्र नीचे लिखा है यदि विधि पूर्वक इस मंत्र का प्रतिदिन जप किया जाए तो बिगड़ा भाग्य भी संवर सकता है साथ ही हर मनोकामना भी पूरी होती है।

मंत्र

ऊँ ह्रीं घृणीं सूर्य आदित्याय नम:



जप विधि

- रोज सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान आदि से निवृत होने के बाद मन ही मन भगवान सूर्य का स्मरण करें।

- उसके बाद सबसे पहले सूर्य की ओर मुंह कर सूर्य नमस्कार करें।

- एक तांबे के पात्र में पुष्पों के साथ तीन बार सूर्य को अघ्र्य अर्पित करें।

- फिर इस मंत्र का जितनी बार हो सके उतनी बार जप करें।

- जप लाल चंदन की माला से करें तथा कुश के आसन पर बैठें तो मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाता है।




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Saturday, April 30, 2011

जानिए, पितृदोष से क्या होता है? यह कैसे दूर होगा?



ज्योतिष के अनुसार कुंडली में कई प्रकार दोष बताए गए हैं, जैसे कालसर्प योग, मंगल, पितृ दोष आदि। इनमें से पितृदोष का हमारे सभी कार्यों पर बुरा प्रभाव पड़ता है। अधिक मेहनत के बाद भी सफलता प्राप्ति में कई अड़चनें आती हैं। परिवार में कई प्रकार की समस्याएं चलती रहती हैं।

वास्तव में पितृदोष का अर्थ यही होता है यदि हमारे पितृ यानि पितर देवता संतुष्ट नहीं हैं तो इस तरह की परेशानियां जीवन में आती हैं। इन्हें तृप्त करने के लिए कई प्रकार के विधि-विधान बताए गए हैं लेकिन सबसे सरल और कारगर उपाय है गरीब बच्चों को मिठाई खिलाना।

छोटे गरीब बच्चों को मिठाई खिलाना, उन्हें खिलौने देकर खुश करने से हमारा पुण्य तो बढ़ता है साथ ही पितृदोष का प्रभाव भी कम होता है। गरीब बच्चों की दुआं के प्रभाव से हमारे सभी दुख, दर्द और क्लेश दूर होते हैं। पितृदोष दूर करने का यह सबसे अच्छा उपाय बताया गया है।

एक ओर इस पुण्य कर्म से गरीब बच्चों को खाना मिलता है, खुशी मिलती है वहीं दूसरी ओर हमारे कई बिगड़े कार्य स्वत: ही पूर्ण हो जाते हैं, घर-परिवार के सदस्यों को सफलता मिलती हैं, प्रसन्नता का वातावरण बनता है। इसी वजह से ज्योतिष के अनुसार पितृदोष दूर करने के लिए गरीब बच्चों को मिठाई खिलाने और उन्हें खिलौने देने का उपाय बताया गया है।

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इस उपाय से टेंशन को कहें अलविदा



वर्तमान समय में हर कोई चिंताग्रस्त नजर आता है। किसी को नौकरी की चिंता है तो किसी को परिवार की। किसी को पैसे की चिंता है तो किसी को बेटे की। यानि हर व्यक्ति को किसी न किसी बात की चिंता अवश्य है। यंत्र विज्ञान के अंतर्गत एक ऐसे यंत्र के बारे में बताया गया है जिसका प्रतिदिन पूजन करने से हर प्रकार की चिंता दूर हो जाती है। इस यंत्र को चिंतामणी यंत्र कहते हैं। इसे प्रतिष्ठित कर पूजा भी का जा सकती है साथ ही इसे धारण भी किया जा सकता है।

इस यंत्र को बनाने व धारण करने की विधि इस प्रकार है:- किसी भी शुभ मुहूर्त में दिए यंत्र को भोजपत्र पर अनार की कलम का उपयोग करते हुए अष्टगंध से बनाएं। अब इस यंत्र को ताबीज में डालकर गले में धारण कर लें। इससे कुछ ही समय में आपकी सभी चिंताएं एवं परेशानियों का नाश हो जाएगा।




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राहु का बुरा प्रभाव दूर करने के उपाय




जन्म कुंडली राहु-केतु को छाया ग्रह माना जाता है परंतु फिर भी यह दोनों ग्रह व्यक्ति की जीवन दिशा बदलने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं। राहु की महादशा में गरीब भी किसी राजा के समान सुख प्राप्त करने लगता है और राहु विपरित होने पर रातोरात एक राजा भी रोड पर आ जाता है।

यदि आपकी कुंडली में राहु अशुभ है और इसकी वजह से आपके सारे काम बिगड़ जाते हैं तो यह उपाय करें:

- प्रति सोमवार भगवान शिव का जलाभिषेक या रुद्राभिषेक अवश्य करें।

- लोहे के बर्तन में खाना खाएं।

- गरीबों को कंबल, खाना, अनाज आदि उनके जरूरत की वस्तुएं दान करें।

- राहु से संबंधी वस्तुएं दान में स्वीकार ना करें।

- सोमवार या शनिवार का उपवास रखें।

- शिवलिंग की नित्य नियम से पूजा करें, बिल्व पत्र, धतुरा आदि शिव को प्रिय वस्तुएं अर्पित करें।

- राहु को काला रंग अतिप्रिय है, काले रंग से वह और अधिक सक्रीय हो जाता है। अत: अपने आसपास से काले रंग को पूर्णतया दूर कर दें।

- मछलियों को आटे की छोटी-छोटी गोलियां बनाकर खिलाएं।

- अपने विश्वासपात्र ज्योतिषी से परामर्श लें।


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अशुभ ग्रहों का प्रभाव कम करता है यह रत्न



ज्योतिष के अनुसार, सौर मण्डल के क्रूर व अनिष्टकारी ग्रह अपनी गति बदलते रहते हैं। इनके अशुभ प्रभाव से मनुष्य के स्वास्थ्य, बुद्धि और जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इंसान के जीवन में शुभ-लाभ मुनाफा या हानि सब इन्हीं ग्रहों के प्रभाव के कारण होता है। ऐसी स्थिति कब आएगी जब हम पर ग्रह प्रभाव डालेगा यह हम हर वक्त नहीं जान सकते हैं, इसी परेशानी से बचने के लिए नवरत्न धारण किये जाते है।

नवरत्न ग्रहों के अशुभ प्रभाव को दूर करता है। कभी-कभी किसी कुडंली में ग्रहों की दशा ऐसी बन जाती है कि निर्णय लेना कठिन हो जाता है कि कौन सा रत्न पहनना शुभकारी है। ऐसी स्थिति में नवरत्न को कोई भी धारण कर सकता है, यह हर राशि वाले को सामान लाभदायक होता है। हर हाल में यह रत्न धारक को फायदा पहुंचाते हैं, कभी भी नुकसान नहीं देते हैं।

नवरत्न सोने में या चांदी में धारण करना चाहिए। नवरत्न धारण करने से सुख-सम्पदा, मान-प्रतिष्ठा, यश, धन, संतान, सौभाग्य व परिवारिक, मानसिक सुख सब कुछ भरपूर मात्रा में प्राप्त होता है। इसे धारण करने से समस्त प्रकार के अनिष्ट दूर होते है। रोगों में लाभ मिलता है।





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