Friday, April 29, 2011

सिर्फ इन 9 चित्रों में समाई है संपूर्ण रामायण!!


रामायण प्रमुख हिन्दू धर्मग्रंथ है। रामायण में भगवान श्री राम का मर्यादित चरित्र  व्यावहारिक जीवन के अनमोल सूत्रों को भी सिखाता है। श्रीराम ही नहीं रामायण में बताया हर पात्र मानवीय जीवन, स्वभाव और गुणों से जुड़े कोई न कोई संदेश देता है। जिनके द्वारा कोई भी इंसान जीवन में संयम, संतुलन और अनुशासन लाकर सफलता व तरक्की पा सकता है।

यही कारण है कि धर्म में रूचि रखने वाले और आस्थावान अनेक लोग रामायण को पढऩा और जानना चाहते हैं। किंतु समय के अभाव के चलते वे रामकथा को सुनने या पढऩे से वंचित रहते हैं। इसी जिज्ञासा को शांत करने के लिए हम यहां बता रहे हैं मात्र 9 तस्वीरों के माध्यम से शास्त्रों में बताए एक श्लोक पर आधारित रामायण, जो एक श्लोकी रामायण के रूप में जानी जाती है।

यहां बताई जा रही एक श्लोकी रामायण को प्रतिदिन राम दरबार जिनमें राम, सीता, लक्ष्मण, हनुमान आदि शामिल हों, का ध्यान कर पढऩा भी आपके जीवन से भय, चिंता और परेशानियों को दूर करने वाली मानी गई है -

आदौ राम तपोवनादि गमनं, हत्वा मृगं कांचनं
वैदेही हरणं, जटायु मरणं, सुग्रीव संभाषणं
बाली निर्दलं, समुन्द्र तरणं, लंकापुरी दाहनं
पश्चाद्रावण-कुम्भकरण हननं, एतद्धि रामायणं
अगर आपकी धर्म से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें।


 

भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम का जन्म चैत्र शुक्ल नवमी को अयोध्या में रघुवंशी राजा दशरथ के यहां माता कौशल्या के गर्भ से हुआ।
 

अयोध्या की रानी कैकयी द्वारा राजा दशरथ से मांगे वर के कारण राम को वनवास हुआ। उनके साथ पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण भी वन गए।
 

रावण ने सीता हरण के इरादे से राक्षस मारीच को भेजा, जिसने स्वर्णमृग यानी हिरण बन सीता को मोहित किया। राम स्वर्णमृग पकडऩे गए।
 
इस अवसर का लाभ उठाकर रावण द्वारा सीता हरण। सीता की रक्षा में पक्षीराज जटायु ने प्राण त्यागे।
 
सीता खोज में राम की सुग्रीव से भेंट।
 

सुग्रीव को अन्याय और दु:खों से मुक्ति दिलाने के लिए श्री राम द्वारा उसके भाई बाली का वध।
 

सीता की खोज में बलवीर हनुमान द्वारा समुद्र पार कर लंका प्रवेश। सीता की खोज की और लंका दहन कर रावण का दंभ तोड़ा।
 

श्री राम द्वारा लंका पर चढ़ाई के लिए समुद्र पर सेतु का निर्माण।
 

लंका पंहुचकर श्रीराम द्वारा रावण और उसके भाई कुम्भकरण आदि का अंत किया। सीता को लेकर अयोध्या लौटे।

Varinder Kumar
ASTROLOGER
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email :sun_astro37@yahoo.com
 

Thursday, April 28, 2011

3, 12, 21 या 30 को जन्मे लोग होते हैं मनमौजी





जिन लोगों का जन्म किसी भी माह की तारिख 3, 12, 21, 30 को हुआ हैं वे सभी अंक 3 के व्यक्ति माने जाते हैं। अंक 3 वाले लोग काफी महत्वकांक्षी होते हैं।

अंक तीन या 3 का ग्रह स्वामी गुरु अर्थात बृहस्पति है, ज्योतिष और न्यूमरोलॉजी के अनुसार इस अंक से संबंधित लोगों पर बृहस्पति विशेष रूप से प्रभावित करता है। यह लोग अधिक समय तक किसी के अधीन कार्य करना पसंद नहीं करते, ये उच्च आकांक्षाओं वाले होते हैं। इनका लक्ष्य उन्नति करते जाना होता है, अधिक समय एक जगह रुककर यह कार्य नहीं कर सकते। इन्हें बुरी परिस्थितियों से लडऩा बहुत अच्छे से आता है।

इस अंक के व्यक्ति बहुत भावुक होते हैं और अनुशासन बहुत पसंद करते हैं। जीवन में हर समय खुश रहना और दूसरों को खुश रखना ही इनका लक्ष्य होता है, यह स्वभाव से बहुत मनमौजी होते हैं। अपने से बड़ों के आदेशों पालन करते हैं और चाहते हैं कि इनके आदेशों का भी पालन उसी तरह किया जाए।

अंक 3 के लोग हर क्षेत्र में ऊंचाई पर पहुंचते हैं। इन्हें मेहनत अधिक करना होती है परंतु अंतत: सफलता प्राप्त कर लेते हैं। कभी-कभी ये तानशाही भी करने लगते हैं इसी वजह से इनके कई विरोधी हो जाते हैं। अति स्वाभीमानी और दूसरों के प्रति आभार मानना भी इन्हें पसंद नहीं होता।

- इनके लिए मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार अधिक शुभ होते हैं।

- हर माह की 6, 9, 15, 18, 27 तारिखें इनके लिए विशेष रूप से लाभदायक हैं।

- इन लोगों की अंक 6 और अंक 9 वाले व्यक्तियों से काफी अच्छी मित्रता रहती है।

- रंगों में इनके लिए बैंगनी, लाल, गुलाबी, नीला शुभ होते है।




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कैसी भी परेशानी हो, शिवजी की इस पूजा से दूर करें...



यदि आपका व्यवसाय ठीक से नहीं चल रहा, धन हानि हो रही है या आप नौकरी में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो शिवजी का पूजन सर्वश्रेष्ठ है। शिवजी को निम्र विधि से पूजें, आपकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाएगी।

शिव पूजन की विधि

व्यापार एवं नौकरी या अन्य किसी समस्या को दूर करने के लिए सर्वप्रथम मिट्टी के शिवलिंग का बाएं हाथ में निर्माण करें। हाथ के नीचे एक थाली रख लें। इसके बाद दाहिने हाथ से शिवजी का पूजन करें। शिवजी को भस्म, चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य बताएं। बिल्वपत्र अर्पण करके शिवमहिम्न स्तोत्र अथवा रुद्राष्टक पाठ के साथ जल मिश्रित दूध धारा से अभिषेक करें। दोनों पाठ याद नहीं हो तो 10 मिनट तक ओम नम: शिवाय का मंत्र जप के साथ अभिषेक करें। साथ ही 11 बिल्वपत्र ओम नम: शिवाय बोलकर अर्पण करें। बिल्वपत्र कोमल हो तथा डंठल ज्यादा नहीं होना चाहिए। तीन पत्ते की बिल्वपत्र ही शिवजी को अर्पित करें। यह क्रम सोमवार से शुरू होकर 40 दिन तक होना चाहिए। इससे व्यापार एवं नौकरी में निश्चित सफलता प्राप्त होगी।

एक अन्य उपाए-

ओम श्री श्रियै नम: मंत्र के साथ 108 बिल्वपत्र गाय के घी में डुबोकर प्रज्जविलत अग्नि से आहुति देने से लक्ष्मी वृद्धि, व्यापार वृद्धि, नौकरी में सुगमता होती है।

प्रयोग विधि: पलाश की लकड़ी में प्रज्जवलित अग्नि में 21 दिन तक नित्य हवन करने से सफलता मिलती है।


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शनि प्रदोष 30 को, पुत्र सुख देता है यह व्रत



भगवान शंकर अनन्त व अविनाशी है। इन्हें प्रसन्न करने के लिए धर्म ग्रंथों में कई प्रकार के उपवास व व्रतों के बारे में बताया गया है। इन्हीं में से एक व्रत है प्रदोष व्रत। प्रत्येक माह की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत किया जाता है। विभिन्न वारों के साथ यह व्रत विभिन्न योग भी बनाता है। जब त्रयोदशी शनिवार को आती है तो शनि प्रदोष व्रत किया जाता है। इस बार यह व्रत 30 अप्रैल, शनिवार को है। पुराणों के अनुसार शनि प्रदोष व्रत करने से पुत्र की प्राप्ति होती है।

शनि प्रदोष व्रत के पालन के लिए शास्त्रोक्त विधान इस प्रकार है। किसी विद्वान ब्राह्मण से यह कार्य कराना श्रेष्ठ होता है- 

 - प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र,  गंध, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, नैवेद्य, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान को चढ़ाएं।

- शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें।  शिवजी का षोडशोपचार पूजा करें। जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें।

- भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं।

- आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जप करें ।

- रात्रि में जागरण करें।

इस प्रकार समस्त मनोरथ पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए व्रती को प्रदोष व्रत के धार्मिक विधान का नियम और संयम से पालन करना चाहिए।


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आपके लिए कितना शुभ है "महापद्म" कालसर्प योग





जिस व्यक्ति की कुंडली के छठे भाव में राहु और केतु बारहवें भाव में स्थित होता है और बचे हुए सात ग्रह इनके बीच में स्थित होते है तो उन लोगों की कुंडली में  महापद्म नाम का कालसर्प योग बनता है। इस योग कं कारण जातक अपने शत्रुओं को हराने वाला और उनका नाश करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा अपने शत्रुओं से जितने वाला होता है। इस तरह का कालसर्प योग जिन लोगों की कुंडली में होता है वैसे लोग विदेशों से व्यापार कर के लाभ कमाते हैं। लेकिन कभी कभी ज्यादा समय घर से बाहर रहने के कारण उसके घर में शांति का अभाव रहता है। इस कालसर्प योग के कारण जातक यात्रा बहुत करता है और उसे  बिजनेस से संबंधित यात्राओं में सफलता भी मिलती है। इस योग वाले जातक को एक ही चिज मिल सकती है धन या सुख। इस योग वाले लोगों को कई बार विश्वास पात्र लोगों से भी धोखा मिल जाता है इस वजह से उनके मन में निराशा की भावना पैदा हो जाती है। ऐसे लोग बहुत जल्दी अपने मन में शत्रुता पालकर रखने वाले भी होते हैं। कभी कभी ऐसे कालसर्प योग वाले जातक का चरित्र बहुत संदेहास्पद हो जाता है। उसके धर्म की हानि होती है। वह समय-समय पर  सपनों में संकेत भी मिलते हैं। उसकी वृध्दावस्था कष्टप्रद होती है। इतना सब कुछ होने के बाद भी इनके जीवन में एक अच्छा समय आता है उस समय इनको मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। इस योग वाले अच्छे वकील या राजनीति के क्षेत्र में बहुत बड़ी सफलता पाने वाले नेता होते हैं।



क्या उपाय करें इस काल सर्पयोग वाले-

- श्रावणमास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।

- काले कपड़े पहन कर राहु बीज मंत्र की 18 या 3 माला जपें। उसके बाद एक बर्तन में जल, दुर्वा और कुश लेकर पीपल की जड़ में डालें।

- भोजन में मीठा चूरमा, मीठी रोटी समयानुसार रेवड़ी, तिल के बने मीठे पदार्थ सेवन करें और यही दान में भी दें।

- रात को घी का दीपक जलाकर पीपल की जड़ के पास रख दें।

- इलाहाबाद (प्रयाग) में संगम पर नाग-नागिन की विधिवत पूजन कर दूध के साथ संगम में प्रवाहित करें और तीर्थराज प्रयाग में संगम स्थान पर तर्पण श्राध्द भी एक बार जरूर करें।

- मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का 108 बार पाठ श्रध्दापूर्वक करें।




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