Friday, May 6, 2011

लाल किताब (वर्णन और ज्योतिष उपाए



जब भी ज्योतिष की बात होती है तब लाल किताब का जिक्र जरूर आता है। जानकारी के अनुसार की लाल किताब की रचना पिछली शताब्दी में हुई थी और यह मूल रुप से तात्कालिन समय में उत्तर भारत में प्रचलित भाषा में लिखी गई थी।चूँकि इसके लेखक ने जो किताब लिखी थी उसका जिल्द लाल रंग का था, इसलिए यह “लाल किताब” के रुप में पहचाना जाने लगा।

यह हम जानते हैं कि ग्रह मानव जीवन पर उनके पुर्व कर्मानुसार शुभ व अशुभ प्रभाव डालते हैं । ग्रहों के अशुभ प्रभावों को कम करने के उद्देश्य से लाल किताब में काफी सिद्ध,सरल एवं सस्ते उपायों को बताए गए हैं। इसके अलावा लाल किताब के ज्योतिष सिद्धांत पाराशरी पद्धति से कुछ भिन् नहैं, जिसके बारे में हम आगे चर्चा करेंगे। यहाँ पर यह भी बताना उचित होगा कि लाल किताब में ग्रहों और सामुद्रिक शास्त्र को साथ में जोड़ा गया है, यानी की हाथ की लकीरों से जन्म कुंडली के ग्रहों का मिलान। इस लेख में हम लाल किताब के ग्रह ज्योतिष की बात करेंगे।

लाल किताब में लग्न या पहला घर हमेशा मेष राशि रहता है, दूसरा घर वृषभ, और तीसरा मिथुन और क्रमानुसार, इस श्रृंखला में कभी कोई बदलाव नहीं आता।

गृह दोष 

अब एक उदहारण लेकर हम आपको लाल किताब के फलित ज्योतिष व उपायों से अवगत करायेंगे।

यदि सूर्यआपकी जन्म कुंडली में छठे घर (भाव या खाने ) में हो तो -
मुकदमों पर अधिक खर्च होगा, सेहत अच्छी नहीं होगी, पुत्र होने पर ही समय अनुकूल होगा।

लाल किताब में इसके लिए यह उपाय बताए गए हैं -
१. बंदरों को गुड और गेहूं खिलाना
२. अपने पास चांदी रखना
३. अपनी माँ तथा दादी के पाँव धोना

यदि चन्द्रमा आपकी जन्म कुंडली मेंअष्टम घर (भाव या खाने ) में हो तो -
पढाई के बीच में अड़चन या माता के सुख से वंचित हो जाना। उपरी आमदनी के सहारे की जरूरत महसूस करना।
लाल किताब में इसके लिए उपाय यह बताये गए हैं -
१. पूर्वजों के नाम पर अन्न दान व वस्त्र दान
२. गुड, हल्दी, लाल कपडा, बिजली से चलने वाले यन्त्र, पीतल व ताम्बे के बर्तन, ये सभी वस्तुएं मंदिर में देना

यदि बुध आपकी जन्म कुंडली में नौवें घर (भाव या खाने ) में हो तो -
जातक को अल्प आयु का भय, धोखा देने वाले साथी, बोलने में तोतलापन, और बेइज्जती का सामना करना पड़ सकता है।
लाल किताब में इसके लिए यह उपाय बताये गए हैं -
१. चांदी शरीर पर धारण करना
२. नए कपड़ों पर पानी के छींटे मार कर, फिर पहनना
३. हरे रंग का इस्तेमाल कम करना

शनि साढ़ेसाती के उपाए 

लाल किताब में शनि की साढ़ेसाती के भी बहुत सरल उपाए दिए गए हैं। जन्म राशि से बारहवें, पहले और दूसरे भाव में गोचरवश शनि जब प्रवेश करता है, तब जातक की साढ़ेसाती होती है, ज्योतिष शास्त्र में ऐसे कहा गया है (आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में स्थित हो, उसे जन्म राशि कहते हैं)।

उदहारण

अगर आपका चन्द्रमा मिथुन राशि में है और अगर आपकी शनि साढ़ेसाती चल रही है तो लाल किताब में ये उपाय दिए गए हैं -
१.) पहले चरण के टोटके व उपाए
* सूखा नारियल या बादाम जल में बहायें
* शनिदेव की उपासना करें
* महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें या कराएं

२.) दूसरे चरण के टोटके व उपाए
* बावड़ी में ताम्बे का पैसा डालें
* शिवलिंग पर दूध चढ़ायें
* हनुमान चालीसा का पाठ करें
* बच्चों को दो दुकानों से आम लेकर बराबर बराबर बांटे

३.) तीसरे चरण के टोटके व उपाए
* मजदूर की सेवा या पालन करें
* शराब न पीये और चाल चलन ठीक रखें
* धर्म स्थान पर नंगे पैर जाएँ
* हनुमानजी की उपासना करे

इसी तरह सभी राशियों के शनि साढ़ेसाती के उपाए लाल किताब में आप पाएंगे।

पितृ ऋण (दोष) 

हमारे देश में पितृ दोष से कोई अनजान नहीं है। इसकी वजह से कई परिवारों को अशांति और तकलीफ उठानी पड़ती है और कोई सहारा नहीं मिलता।
ऐसे में लाल किताब में सभी ग्रहों से जुड़े पितृ दोष के उपाए बताएं गए हैं, जिससे हम अपनी तकलीफ को कम करने में सक्षम होते हैं।

उदहारण 

सूर्य अगर आपकी कुंडली में बारहवें स्थान पर हो तो हमें ये ज्ञात होता है कि उन बच्चों का श्राप मिला है जिन बच्चों को हमने जन्म से पहले ही मार दिया ( गर्भपात)।
आपको इसका असर ऐसे मालूम होगा कि आपके घर के मुख्य द्वार के पास से बगैर किसी कारण से बार बार गन्दा पानी बहता होगा या जमा होगा।

लाल किताब में इसका उपाए दिया हुआ है – 
* ब्राह्मणों से यज्ञ करवाएं और यज् ञका खर्चा परिवार में जितने लोग हैं, सब आपस में बराबर हिस्सों से योगदान करें.
* इसी प्रकार हर ग्रह से पितृ दोष का हमें कुछ अनुमान मिलता है और हमें उसके निवारण हेतु जानकारी लाल किताब में मिलती है।

मंगल दोष

हमारे समाज में प्रायः यह देखा गया है की मंगल दोष की वजह से अच्छे रिश्ते होने के बावजूद शादी में रुकावट आ जाती है और रिश्ता नहीं बन पाता। इस सन्दर्भ में भी लाल किताब से फायदा उठाया जा सकता है। (मंगल ग्रह जब जन्म कुंडली में लग्न, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम, या द्वादश भाव में बैठता है, तो इसे मंगल दोष कहा जाता है )

उदाहरण 

वृषभ लग्न में अगर मंगल सप्तम भाव में है तो लाल किताब में निम्नलिखित उपाए दिए हुए हैं।
* चाल चलन ठीक रखें
* सुन्दरकाण्ड का पाठ करें
* साली, मौसी, और बुआ के घर जब भी जाएँ, मिठाई लेकर जाएँ
* बहन या किसी लड़की को प्रतिदिन मीठा दें
* ताम्बे या सोने की अंगूठी में मूंगा जड़वाकर पहने

इसी तरह से हर लग्न के लिए और हर भाव में मंगल के दोष के लिए उपाए लाल किताब में बतलाएं गए हैं ।

लाल किताब में सिर्फ यही नहीं किन्तु और भी बहुत कुछ बतलाया गया है जिससे हम जीवन का स्तर बेहतर और ऊंचा बना सकते हैं तथा परेशानियों से छुटकारा पा सकते हैं।




Varinder Kumar
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घर में मंगल ही मंगल करे अक्षय तृतीया पर इन चीजों का दान



दान, धर्म पालन का अहम अंग माना गया है। असल में दान अहंकार भाव को दूर रख इंसान को सरल और सहज बनाए रखता है। इसलिए हिन्दू धर्म शास्त्रों में धार्मिक और व्यावहारिक नजरिए से दान का बहुत महत्व बताया गया है और देव उपासना की परंपराओं में भी दान के लिए कुछ विशेष घडिय़ां बहुत ही पुण्यदायी मानी गई है।

ऐसी ही शुभ घड़ी है अक्षय तृतीया। यह तिथि दान प्रधान है। इस दिन किये गये दान-पुण्य का फल अक्षय माना जाता है। यही कारण है कि शास्त्रों में घर-परिवार में सुख और शांति के लिए इस दिन यथाशक्ति विशेष वस्तुओं का दान फलदायी माना गया है। आप भी नीचे बताई वस्तुओं का यथाशक्ति दान कर पुण्य कमा सकते हैं -

- जल से भरा मिट्टी का घड़ा, कलश

- कलश के साथ ककड़ी या खरबूजा 

- पंखा, चरण पादुका

- छाता

- सोने के बर्तन

- अनाज

- जौ, गेंहू

- चने का सत्तू

- दही-चावल

- गाय

- भूमि

- गर्मी के मौसम में उपयोगी पदार्थ और वस्तुएं

- मौसमी फलों

- गन्ने का रस

- दूध से बनी मिठाईयां

- पितरों को पिंडदान

- जल दान

इस प्रकार इस पुण्य तिथि को पूर्ण आस्था और हृदय से किया गया दान अक्षय होता है।




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Thursday, May 5, 2011

क्या असर दिखाएगी, ये ग्रहों की उथल पुथल..



इस महीने के शुरुआती 15 दिनों में लगभग सभी ग्रह अपनी राशियां बदल रहे हैं। महीने की शुरुआत में ही मंगल अपनी राशि में आ गया है। उसी दिन राहु और केतु भी अपनी उच्च राशियों से निकल कर नीच राशि में आ गए हैं। अब 8 मई को गुरु मेष राशि में आ जाएगा। फिर 10 को शुक्र और 11 को बुध, ये दोनों ग्र्रह भी मेष राशि में आ जाएंगे। 15 मई को सूर्य अपनी उच्च राशि से निकल कर वृष राशि में चला जाएगा। 15 दिन के अंतराल में ही इतने ग्रहों का राशि बदलना  ज्योतिषिय नजरिये से अच्छा नही माना गया है। ये स्थिति अशुभ फल देने वाली रहेगी। देश- दुनिया पर इसके कई गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं।

इसके परिणाम स्वरूप मूल्यवान धातुओं में कमी, अचानक मौसम परिवर्तन, और कई राष्ट्रीय मुद्दे सामने आएंगे। युद्ध चाहने वाले देश शांति के प्रयासों में बाधा पहुचाएंगे। पेट्रोल-डीजल के भाव बढ़ेंगे। सरकार और जनता में असहमति और मतभेद की स्थिति बनेगी। सर्वोच्च न्यायालय के कुछ फैसलों से भी ऐसी स्थिति बन सकती है। मौसम संबंधित परिवर्तन आ सकते हैं। इन परिवर्तनों से बीमारीयां होने के योग बनेंगे। विदेशी धन से संबंधित मुद्दे निर्णयों की तरफ बढ़ेंगे। उच्च प्रशासनिक अधिकारियों के घोटालें भी सामने आ सकते हैं।

दुर्घटनाएं बढ़ेगी। नक्सलवादी, माओवादीयों जैसी हिंसक घटनाएं बढ़ सकती है।




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अक्षय तृतीया: आज है मौका, राशि अनुसार मंत्र से पाएं पैसा ही पैसा



आज शुक्रवार को अक्षय तृतीया का योग बन रहा है। इस योग पर अखंड सुख-समृद्धि और धन प्राप्ति के लिए राशि के अनुसार अलग-अलग उपाय बताए गए हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अक्षय तृतीया के इस पर्व पर धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी आराधना के लिए राशि अनुसार मंत्र बताए गए हैं। अगर आप अपनी राशि के अनुसार लक्ष्मी मंत्रों का जप करेंगे तो इन मंत्रों से महालक्ष्मी जल्द ही प्रसन्न हो जाएगी और कुछ ही दिनों में इन मंत्रों का प्रभाव दिखाई देना शुरू हो जाएगा।



मेष- मंगल की राशि वाले इस पर्व पर "ऊँ ऐं क्लीं सौं:" मंत्र का जप करें।

वृष- अपने राशि स्वामी शुक्र देव के अनुसार "ऊँ ऐं क्लीं श्रीं" मंत्र का जप करें।

मिथुन- "ऊँ क्लीं ऐं सौ:" इस मंत्र का जप आपके लिए लाभदायक रहेगा।

कर्क- इस राशि वालों के लिए "ऊँ ऐं क्लीं श्रीं" मंत्र का जप लाभदायक रहेगा।

सिंह- सूर्य की राशि वालों के लिए "ऊँ ह्रीं श्रीं सौ:" मंत्र का जप धन देने वाला रहेगा।

कन्या- "ऊँ श्रीं ऐं सौं" इस मंत्र का जप करने से कन्या राशि वालों पर लक्ष्मी जी जरुर प्रसन्न होगी।

तुला- शुक्र देव को प्रसन्न करने के लिए तुला राशि वाले "ऊँ श्रीं ऐं सौं" इस मंत्र का जप करें।

वृश्चिक- "ऊँ ऐं क्लीं श्रीं" मंत्र का जप इस राशि वालों के लिए सबसे अच्छा माना गया है।

धनु- "ऊँ ह्रीं क्लीं सौं:" मंत्र का जप धनु राशि वालें करें।

मकर- इस राशि वाले लोग "ऊँ ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं सौं:" मंत्र का जप करें।

कुंभ- लक्ष्मी जी को प्रसन्न करने के लिए कुंभ राशि के लोग "ऊँ ह्रीं ऐं क्लीं श्रीं" मंत्र का जप करें।

मीन- "ऊँ ह्रीं क्लीं सौं:" मंत्र का जप करने से मीन राशि वालों को बहुत जल्दी ही फायदा होगा।


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