Monday, July 11, 2011

...इसलिए दरवाजे पर जरूर लगाएं आम की लकड़ी का स्वस्तिक



हिन्दू धर्म व भारतीय संस्कृति में मांगलिक चिन्हों का विशेष महत्व है। स्वस्तिक, ऊं, गणेशजी आदि कुछ ऐसे चिन्ह है। जिन्हें बहुत शुभ व मंगलमय माना गया है। इसीलिए शादी हो या अन्य कोई कार्यक्रम इन सभी चिन्हों को पूजन में जरूर किया जाता है। सभी मांगलिक चिन्हों में से स्वस्तिक सबसे कल्याणकारी चिन्ह है। इस चिन्ह को सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। जिन्हें शुभ कार्यो में आम की पत्तियों को आपने लोगों को अक्सर घर के दरवाजे पर बांधते हुए देखा होगा क्योंकि आम की पत्ती ,इसकी लकड़ी ,फल को ज्योतिष की दृष्टी से भी बहुत शुभ माना जाता है।

आम की लकड़ी और स्वास्तिक दोनों का संगम आम की लकड़ी का स्वस्तिक उपयोग किया जाए तो इसका बहुत ही शुभ प्रभाव पड़ता है। यदि किसी घर में किसी भी तरह वास्तुदोष हो तो जिस कोण में वास्तु दोष है उसमें आम की लकड़ी से बना स्वास्तिक लगाने से वास्तुदोष में कमी आती है क्योंकि आम की लकड़ी में सकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करती है। यदि इसे घर के प्रवेश द्वार पर लगाया जाए तो घर के सुख समृद्धि में वृद्धि होती है। इसके अलावा पूजा के स्थान पर भी इसे लगाये जाने का अपने आप में विशेष प्रभाव बनता है। इससे घर से कई तरह के वास्तुदोषों का प्रभाव बहुत कम हो जाता है। इसीलिए घर के दरवाजे पर आम की लकड़ी का स्वस्तिक जरूर लगाना चाहिए ताकि घर में हमेशा सुख-समृद्धि बनी रहे।




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अब चार महीनों तक न उठेगी डोली और न सजेगी बारात क्योंकि...



शादी-ब्याह पर चार माह के लिए रोक लग जाएगी। हिन्दू धर्म में चर्तुमास में विवाह निषेध माने गए हैं। इसका कारण यह है कि धार्मिक शास्त्रों के  अनुसार यह मान्यता है कि आषाढ़ शुक्ल पक्ष में एकादशी तिथि से भगवान चार मास तक क्षीर समुद्र में शयन करते हैं और कार्तिक शुक्ल एकादशी को जागते हैं। पुराण के अनुसार यह भी कहा गया है कि भगवान हरि ने वामन रूप में दैत्य बलि के यज्ञ में तीन पग दान के रूप में मांगे। भगवान ने पहले पग में संपूर्ण पृथ्वी, आकाश और सभी दिशाओं को ढक लिया। 

अगले पग में सम्पूर्ण स्वर्ग लोक ले लिया। तीसरे पग में बलि ने अपने आप को समर्पित करते हुए सिर पर पग रखने को कहा। इस प्रकार के दान से भगवान ने प्रसन्न होकर पाताल लोक का अधिपति बना दिया और कहा वर मांगो। बलि ने वर मांगते हुए कहा कि भगवान आप मेरे महल में नित्य रहें। बलि के बंधन में बंधा देख उनकी भार्या लक्ष्मी ने बलि को भाई बना लिया और भगवान से बलि को वचन से मुक्त करने का अनुरोध किया। तब इसी दिन से भगवान विष्णु जी द्वारा वर का पालन करते हुए तीनों देवता 4-4 माह पाताल में निवास करते हैं। शादी-ब्याह पर रोक लगाने का एक कारण यह भी है। इन चार माह में बादल और वर्षा के कारण सूर्य-चन्द्रमा का तेज क्षीण हो जाना उनके शयन का ही द्योतक होता है।

इस समय में पित्त स्वरूप अग्नि की गति शांत हो जाने के कारण शरीरगत शक्ति क्षीण या सो जाती है। आधुनिक युग में वैज्ञानिकों ने भी खोजा है कि कि वर्षा ऋतु में विविध प्रकार के कीटाणु अर्थात सूक्ष्म रोग जंतु उत्पन्न हो जाते है। साथ ही इन दिनों ही कई बड़े त्यौहार आते हैं। इसीलिए त्यौहार व शादी दोनों का उल्लास और हर्ष समय-समय पर बना रहे। इसीलिए चार माह तक शादी-ब्याह नहीं किए जाते हैं।




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