Monday, December 12, 2011

इस 1 मंगल मंत्र से पूरे होंगे सुख के सारे अरमान



भगवान शिव मंगलकर्ता माने जाते हैं। इसलिए आस्था है कि शिव के स्मरण मात्र से ही महामंगल और शुभ हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शिव का यही मांगलिक स्वरूप मंगल ग्रह के रूप में प्रकट हुआ। माना जाता है है कि शिव अंश या तेज के भूमि पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ। इसलिए मंगल देव भूमि के गर्भ से पैदा होने वाले और उसके द्वारा पालन-पोषण किए जाने से भूमिपुत्र या भौम नाम से भी पूजनीय है।

यही कारण है कि मंगल पूजा सांसारिक जीवन से जुड़ी तमाम कामनाओं जैसे विवाह, संपत्ति, सेहत, धन, दाम्पत्य, संतान, सफलता आदि सिद्ध करने वाली मानी गई है। इस तरह मंगल उपासना तन से पुष्ट, मन से साहसी व भूमि-संपत्ति व धन से समृद्ध बनाने वाली मानी गई है। मंगल देव भूमि, भार्या या पत्नी के रक्षक भी माने जाते हैं।

मंगलवार मंगल उपासना से जन्मकुण्डली में बने मंगल दोष शांति की भी शुभ घड़ी मानी जाती है। जिससे दाम्पत्य, विवाह और रक्त संबंधी समस्याएं पैदा होती है। इसलिए शास्त्रों में इस दिन विशेष मंगल मंत्र स्त्रोत बोलना इन दु:खों व परेशानियों से निजात दिलाने वाला माना गया है। जानते हैं यह मंगल स्त्रोत और सरल मंगल पूजा विधि -

- मंगलवार की सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र पहन नवग्रह मंदिर में मंगलदेव की प्रतिमा का लाल पूजा सामग्रियों जिनमें लाल चंदन, अक्षत, फूल, लाल वस्त्र व नैवेद्य शामिल हों, 'ऊँ अंकारकाय नम:' यह मंत्र बोल अर्पित करें। धूप, दीप लगाएं व लाल आसन पर बैठ नीचे लिखा छोटा-सा मंगल मंत्र स्त्रोत संकट, बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना के लिये बोलें -

भौमो दक्षिणदिक्त्रिकोणयमदिग्विघ्रेश्वरो रक्तभ:

स्वामी वृश्चिक-मेषयो: सुरगुरुश्चार्क: शशी सौहृद:।

ज्ञोरिः षट् त्रिफलप्रदश्च वसुधा स्कन्दौ क्रमाद् देवते

भारद्वाजकुलोद्भव: क्षितिसुत: कुर्यात् सदा मंङ्गलम्।।

- मंगल मंत्र स्मरण के बाद मंगल देव की धूप, दीप आरती करें व यथासंभव गुड़, केसर मसूर दाल का दान किसी विद्वान ब्राह्मण को करें।




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Saturday, December 10, 2011

इस पत्थर से आप भी बन सकते हैं मालामाल



तंत्र शास्त्र में हकीक को चमत्कारीक पत्थर माना गया है। हकीक का प्रयोग विभिन्न टोटकों एवं प्रयोगों में किया जाता है। यह भी कहा जाता है कि जिसके घर में हकीक होता है, वह कभी गरीब नहीं हो सकता। हकीक पत्थर के कुछ साधारण प्रयोग इस प्रकार हैं-

- किसी शुक्रवार के दिन रात्रि में पूजा उपासना करने के पश्चात एक हकीक माला लें और एक सौ आठ बार ऊँ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करें। इसके बाद माला को लक्ष्मीजी के मंदिर में अर्पित कर दें। धन से जुड़ी हर समस्या हल हो जाएगी।

- यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चढ़ा दें और ऐसा कहें कि अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूं तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है।

- जो व्यक्ति श्रेष्ठ धन की इच्छा रखते हैं वह रात में 27 हकीक पत्थर लेकर उसके ऊपर लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें, तो निश्चय ही उसके घर में अधिक उन्नति होती है

इस तरह यह पत्थर धन से जुड़ी आपकी हर समस्या का हल कर देता है



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Thursday, December 8, 2011

गर्भवती स्त्री को नहीं देखना चाहिए ग्रहण, क्योंकि...



शनिवार, 10 दिसंबर 2011 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। हिंदू धर्म के अनुसार ग्रहण काल के संबंध में कई कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इन्हीं वर्जित कार्यों में से एक है गर्भवती स्त्रियों द्वारा ग्रहण को देखना

विद्वानों और विज्ञान के अनुसार किसी भी गर्भवती स्त्री को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। ग्रहण काल के दौरान चंद्र से निकलने वाली किरणें हम पर बुरा ही प्रभाव भी डालती हैं। इन किरणों से बचना सभी के लिए जरूरी है, खासकर गर्भवती स्त्रियों के लिए। ऐसा माना जाता है यह किरणें गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत अधिक खतरनाक हो सकती हैं।
लुधियाना के ज्योतिषाचार्य Varinder Kumar JI  के अनुसार  इस काल में बुरी शक्तियां अत्यधिक बलशाली हो जाती है। यहां बुरी शक्तियां से आशय बुरी आत्माओं से है। यह शक्तियां गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए तथा गर्भवती स्त्रियों के लिए भी अशुभ है। स्त्रियों के बाहर निकलने पर यह बुरी आत्माएं उन पर प्रभाव डालने का प्रयास करती हैं। जो कि काफी खतरनाक होता है। इसी वजह से गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है जो कि कमजोर लोगों पर बुरा प्रभाव डालती है। गर्भवस्था के दौरान स्त्री का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। ऐसे में स्त्रियों इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए घर में ही रहना जरूरी है। यदि ग्रहण के दौरान बाहर निकलना भी पड़े तो ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में सूर्य को न देखें और पूरी सावधानी रखना चाहिए।
 
 
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बन जाएगा स्वयं का घर, जब चंद्रग्रहण पर करेंगे यह उपाय



हर इंसान का सपना होता है कि उसका एक अपना घर हो, जिसमें वह अपने परिवार के साथ सुकून से रह सके। अगर आप भी चाहते हैं कि आपका अपना घर हो तो चंद्रग्रहण (10 दिसंबर, शनिवार) के अवसर पर नीचे लिखा उपाय अवश्य करें-

उपाय

ग्रहण काल से पहले नहाकर स्वच्छ सफेद रंग के कपड़े पहन लें। इसके बाद ऊन या कुश के आसन पर उत्तर की ओर मुख करके बैठ जाएं। अब अपने सामने एक थाली रखें। इसके बाद एक भोजपत्र लें तथा उस पर अपने स्वयं के मकान होने की मनोकामना केसर से लिख कर रख दें। अब 108 बार नीचे लिखे मंत्र का उच्चारण करें-

ऊँ देवोत्थाय नम:

अब एक मोती शंख लें और उसे भोज पत्र में लपेट कर घर से दूर किसी वट वृक्ष (बड़ का पेड़) के नीचे रख आएं। भगवान ने चाहा तो बहुत ही जल्दी आपके मकान का सपना पूरा होगा।


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जब सपने में दिखने लगे सांप तो समझ लें कि...



जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग होता है उसे हमेशा ही परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कार्य समय पर पूर्ण नहीं होते।

कुंडली न हो तो स्वप्न ज्योतिष के माध्यम से इस योग की जानकारी प्राप्त हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को सपनों में सांप दिखाई देते हैं तो निश्चित ही उसकी कुंडली में कालसर्प योग होगा।

ज्योतिष शास्त्र में कई योग बताए गए हैं जैसे कालसर्प योग, गजकेसरी योग, मालव्य योग, भद्र योग, हंस योग, अंगारक योग, पितृ दोष, चाण्डाल योग आदि। इनमें कालसर्प योग, पितृ दोष और चाण्डाल योग जैसे योग अधिकतर बुरा प्रभाव ही देते हैं। वैसे तो कुंडली के अध्ययन से इन योगों को देखा जाता है लेकिन ज्योतिष में अन्य विधियां भी हैं जिनसे कुंडली के अभाव में इन योग की जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

- सोते हुए सर्प को अपने शरीर की तरफ आते देख घबरा जाना।

- पानी पर तैरता हुआ सांप देखना।

- सपने में सांप को उड़ता हुआ देखना।

- सांप के जोड़े को हाथ पैरों में लिपटा हुआ देखना।

- सपने में असंख्य सांप दिखाई देना।

इस तरह के किसी भी स्वप्न का दिखाई देना आपके जीवन में कालसर्प दोष होने की और संकेत करता है और ऐसे स्वप्नों के बार-बार दिखाई देने पर काल सर्प दोष की पूजा आवश्यक रूप से की जानी चाहिए। इससे कालसर्प दोष की शांति के होने पर मानसिक शांति तो मिलती ही है साथ ही इस तरह के बुरे स्वप्न भी आने बंद हो जाते हैं।

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Wednesday, December 7, 2011

रोड पर गाय को देखकर जानिए आप अपने काम में सफल होंगे या नहीं...




आने वाले अगले ही पल में क्या होने वाला है, यह बता पाना लगभग असंभव सा ही है। केवल ज्योतिष शास्त्र की मदद से संभावित भविष्य मालुम किया जा सकता है। किसी भी खास काम के लिए जाते समय ध्यान दिया जाए तो कई छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं। इन्हीं घटनाओं के आधार आने वाले समय में होने वाली घटनाओं की जानकारी प्राप्त हो सकती है।

शास्त्रों के अनुसार कई प्रकार के शकुन और अपशकुन की मान्यताएं बताई गई हैं। इनका गहराई से अध्ययन करने पर आप कार्य में प्राप्त होने वाली सफलता या असफलता मालुम कर सकते हैं। बहुत से शकुन-अपशकुन पशु-पक्षियों से ही संबंधित है। कहीं जाते समय अक्सर कई पशु-पक्षी हमें दिखाई देते हैं जैसे गाय, कुत्ता, चिडिय़ा, कौआं, कबूतर आदि।

इन पशु-पक्षियों की स्थिति पर ध्यान दिया जाए तो आसानी से समझा जा सकता है कार्यों में सफलता मिलेगी या असफलता। रोड पर सामान्यत: गाय अवश्य ही दिखाई देती है। यात्रा पर या किसी खास कार्य के लिए जाते समय यदि आपको गाय अपने दाहिने हाथ की तरफ दिख जाए तो समझ लेना चाहिए कि आपको कार्य में सफलता प्राप्त होती है। यदि गाय बाएं हाथ की तरफ दिखती है तो सफलता के लिए कड़ी मेहनत करना पड़ता है। यदि आपको गाय सामने से आती दिखाई दे तो समझ लें कि आपको सफलता आसानी से प्राप्त हो जाएगी।  गाय को स्पर्श करके जाने से बिना प्रयास ही सफलता प्राप्त हो जाती है।



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Tuesday, December 6, 2011

चांदी के नाग-नागिन को नदी में बहाएं, आप हो जाएंगे मालामाल...


ज्योतिष के अनुसार कुंडली में बताए गए अशुभ योगों में से एक है कालसर्प योग। इस योग के प्रभाव व्यक्ति को कड़ी मेहनत करना पड़ती है, फिर भी उचित प्रतिफल प्राप्त नहीं हो पाता है। पैसों की तंगी बनी रहती है और पारिवारिक रिश्तों में खटास उत्पन्न होने की संभावनाएं रहती है।

कालसर्प योग के प्रभाव से मुक्ति के कई प्रकार के उपाय बताए गए हैं। इसकी विधिवत पूजा के लिए केवल दो ही स्थान नासिक और उज्जैन श्रेष्ठ माने गए हैं। इन दो स्थानों पर ही कालसर्प योग की शांति के लिए पूजा कराने 
का विधान बताया गया है। इस उपाय के अलावा एक अन्य उपाय बताया गया है कि जिस व्यक्ति की कुंडली में कालसर्प योग है उसकी शांति के लिए उसे किसी पवित्र नदी में चांदी के नाग-नागिन बनवाकर बहा देना चाहिए।

किसी भी शुभ मुहूर्त में चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा बनवाएं। फिर ब्रह्ममुहूर्त में स्नान आदि कर्म करने के बाद नदी के तट पर जाएं। इसके बाद इष्टदेव, शिवजी तथा अन्य देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए। इसके बाद नाग देवता से कालसर्प योग के दुष्प्रभाव समाप्त करने की प्रार्थना करें और चांदी के नाग-नागिन को नदी में प्रवाहित कर दें। इस उपाय से व्यक्ति के जीवन की सभी परेशानियां शांत होने लगती है। पैसों से जुड़ी समस्याओं में कमी आ जाती है।


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