Sunday, May 29, 2011

अपार यश और सुख देता है यह सूर्य मंत्र



वेदों में लिखा गया है - सूर्य आत्मा जगतस्तस्थुषश्च। जिसका अर्थ है सूर्य जगत की आत्मा है। क्योंकि सूर्य की ऊर्जा व रोशनी ही जगत में ऊर्जा व चेतना भरती है। पुराणों में भी सूर्य को ही जगत की उत्पत्ति का कारण मानते हुए सर्वोपरि ईश्वर माना गया है।

हिन्दू धर्म में रविवार का दिन सूर्य उपासना से जीवन को सुखी और सफल बनाने के लिए बहुत ही फलदायी माना गया है। शास्त्रों में सूर्य की उपासना यश, स्वास्थ्य, सम्मान, बुद्धि और धन देने वाली मानी गई है। ज्योतिष शास्त्रों के मुताबिक भी सूर्य की अनुकूलता इंसान को जीवन में अपार सुख-सौभाग्य और सफलता देती है।

सूर्य उपासना से शक्ति, स्वास्थ्य, यश, सफलता कामना पूरी करने के लिए ही यहां बताया जा रहा है सूर्य का वेदोक्त मंत्र। जिसे सूर्य की प्रसन्नता के लिये यथासंभव स्वयं या किसी विद्वान ब्राह्मण से जप कराना बहुत ही सुखकारी होता है -

यह सूर्य मंत्र है -

ॐ आकृष्णेन् रजसा वर्तमानो निवेशयन्न अमृतं मर्त्यं च। 

हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन।।

- रविवार को सुबह स्नान कर जल से भरे कलश में लाल फूल, लाल अक्षत डालकर सूर्य को अर्घ्य देते समय यह मंत्र बोलें। साथ ही कम से कम 108 बार इस मंत्र का जप सूर्य का ध्यान करते हुए करें। इस दिन रविवार का व्रत रख नमक त्यागना बहुत ही शुभ फल देता है।

अगर आपकी धर्म और उपासना से जुड़ी कोई जिज्ञासा हो या कोई जानकारी चाहते हैं तो इस आर्टिकल पर टिप्पणी के साथ नीचे कमेंट बाक्स के जरिए हमें भेजें।




Varinder Kumar
ASTROLOGER
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