Saturday, December 31, 2011

घर के सामने हो गार्डन तो सुखी रहेंगे आप




वास्तु ऐसा माध्यम है जिससे आप जान सकते हैं कि किस प्रकार आप अपने घर को सुखी व समृद्धशाली बना सकते हैं। नीचे वास्तु सम्मत ऐसी ही जानकारी दी गई है जो आपके लिए उपयोगी होगी-

1- ऐसे मकान जिनके सामने एक बगीचा हो, भले ही वह छोटा हो, अच्छे माने जाते हैं, जिनके दरवाजे सीधे सड़क की ओर खुलते हों क्योंकि बगीचे का क्षेत्र प्राण के वेग के लिए अनुकूल माना जाता है। घर के सामने बगीचे में ऐसा पेड़ नहीं होना चाहिए, जो घर से ऊंचा हो।

2- वास्तु नियम के अनुसार हर दो घरों के बीच खाली जगह होना चाहिए। हालांकि भीड़भाड़ वाले शहर में कतारबद्ध मकान बनाना किफायती होता है लेकिन वास्तु के नियमों के अनुसार यह नुकसानदेय होता है क्योंकि यह प्रकाश, हवा और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा के आगमन को रोकता है।

3- आमतौर पर उत्तर दिशा की ओर मुंह वाले कतारबद्ध घरों में तमाम अच्छे प्रभाव प्राप्त होते हैं जबकि दक्षिण दिशा की ओर मुंह वाले मकान बुरे प्रभावों को बुलावा देते हैं। हालांकि पूर्व और पश्चिम की ओर मुंह वाले कतारबद्ध मकान अनुकूल स्थिति में माने जाते हैं क्योंकि पश्चिम की ओर मुंह वाले मकान सामान्य ढंग के न्यूट्रल होते हैं।

4- पूर्व की ओर मुंह वाले घर लाभकारी होते हैं। कतार के आखिरी छोर वाले मकान लाभकारी हो सकते हैं यदि उनका दक्षिणी भाग किसी अन्य मकान से जुड़ा हो या पूरी तरह बंद हो। ऐसी स्थिति में जहां कतारबद्ध घर एक-दूसरे के सामने हों, वहां सीध में फाटक या दरवाजे लगाने से बचना चाहिए।

5- यह भी ध्यान रखना चाहिए कि दक्षिण की ओर मुंह वाले घर यदि सही तरीके से बनाए जाएं तो लाभकारी परिणाम हासिल किए जा सकते हैं।


Friday, December 30, 2011

शनि से इस मंत्र से माफी मांग करें साल का अंत..नये साल बनेंगे सारे काम



शनि कर्म प्रधान देवता है। शनि उपासना कर्म और कर्तव्य के प्रति दृढ़ संकल्पित व प्रेरित करती है। शास्त्रों के मुताबिक शनि बुरे कर्म करने पर ही प्राणियों को अनेक तरह से दण्डित करते हैं, जो धार्मिक दृष्टि से शनि दशा, शनि की चाल या शनि की क्रूर दृष्टि के रूप में जानी जाती है।

माना जाता है कि सांसारिक जीवन में शनि का यह दण्ड शरीर, मन या आर्थिक परेशानियों के रूप में मिलता है। चूंकि हर प्राणी कर्म व कर्तव्यों से किसी न किसी रूप में जुड़ा होता है। इसलिए जिम्मेदारियों को पूरा करते हुए पैदा हुई हित या स्वार्थ पूर्ति की भावना से जाने-अनजाने मन, विचार व कर्म दोषों का भागी बनता है। धर्म की दृष्टि से ऐसे दोषों का शमन प्रायश्चित व क्षमा द्वारा संभव है।

यही कारण है कि वर्ष के आखिरी दिन, सालभर किसी भी रूप में कर्म, विचार या व्यवहार से हुए बुरे कामों के लिए न्यायाधीश शनि का ध्यान कर उनसे विशेष मंत्र से क्षमा मांगना आने वाले साल में भी शनि कृपा से सारे रुके, बिगड़े या मनचाहे कामों को पूरा करने का बेहतर उपाय साबित होगा।

जानते हैं, साल के आखिरी दिन शनिवार के संयोग में शनि पूजा व क्षमा प्रार्थना का विशेष मंत्र -

- शनिवार को स्नान के बाद यथासंभव काले वस्त्र पहनकर शनि मंदिर में शनि देव का ध्यान कर प्रतिमा को पवित्र जल, तिल या सरसों का तेल, काला वस्त्र, अक्षत, फूल, नैवेद्य अर्पित करें। सरल शनि मंत्रों जैसे ॐ शं शनिश्चराय नम:, शनि चालीसा या शनि स्त्रोत का पाठ करें।

 - मंत्र ध्यान व पूजा के बाद शनिदेव की आरती कर नीचे लिखे मंत्र से वर्ष भर जाने-अनजाने हुए बुरे कर्म व विचार के लिये क्षमा मांग आने वाले वक्त को सुखद व सफल बनाने की कामना करें -

अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।

दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व परमेश्वर।।

गतं पापं गतं दु:खं गतं दारिद्रय मेव च।

आगता: सुख-संपत्ति पुण्योऽहं तव दर्शनात्।। 



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नए साल में हर रोज उगते सूरज को इस मंत्र से करें प्रणाम..होगा भाग्योदय



सूर्य प्राण शक्ति देने वाले देवता हैं। हिन्दू धर्म के पंचदेवों  सूर्य, शिव, शक्ति, श्री गणेश, विष्णु में सूर्य ही ऐसे देवता माने जाते हैं, जो हर दिन हर प्राणी और प्रकृति जगत की क्रियाओं और कार्य के साक्षी हैं।

रविवार को सूर्य पूजा का विशेष दिन होता है। धार्मिक मान्यताओं में सूर्य बल, यश, निरोगी जीवन के साथ सौंदर्य देने वाले देवता भी हैं। इस कारण शक्ति और स्वास्थ्य के लिए हर रोज भी सूर्य उपासना का महत्व बताया गया है। इस तरह जीवन में वास्तविक सुंदरता यानी चेहरे के साथ सुंदर मन पाने के लिए भी सूर्य उपासना शुभ मानी गई है, क्योंकि निरोगी तन, मन ही आत्मविश्वास बढ़ाकर कामयाबी तय करता है।

इस बार नए वर्ष का आगाज भी रविवार के साथ हो रहा है। इसलिए इस दिन व पूरे साल की हर सुबह उगते सूरज को शास्त्रों के विशेष मंत्र के साथ प्रणाम करना भाग्य के साथ भविष्य संवारने वाला साबित होगा। जानते हैं यह विशेष सूर्य मंत्र और सरल पूजा विधि -

- रविवार या हर रोज सुबह सूर्योदय के पहले जागकर स्नान करें। सफेद व स्वच्छ वस्त्र पहनें।

- सूर्य के उदय होने पर पूर्व दिशा की ओर मुख कर गंगा जल से अर्घ्य दें।

- घर या किसी मंदिर में सूर्य की प्रतिमा की पंचोपचार पूजा करें।

- पूजा में खासतौर पर सूर्य को गंध या लाल चंदन, लाल रंग के फूल, अक्षत चढ़ाकर धूप और दीप जलाकर आरती करें।

- सूर्य अर्घ्य व सूर्य पूजा में इस सूर्य मंत्र का स्मरण करें -

नमामि देवदेवशं भूतभावनमव्ययम्।

दिवाकरं रविं भानुं मार्तण्डं भास्करं भगम्।

जय लोकप्रदीपाय जय भानो जगत्पते।

जय कालजयानन्त संवत्सर शुभानन।।
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Wednesday, December 28, 2011

पहनें ये रुद्राक्ष, बढऩे लगेगी याददाश्त



क्या आपका बच्चा पढ़कर भूल जाता है?, अधिक परिश्रम करने के बाद भी रिजल्ट ठीक नहीं आता? या बच्चा पढऩे में होशियार तो है लेकिन उसका ध्यान पढ़ाई में नहीं लगता? यदि आपके बच्चे के साथ भी यह समस्याएं हैं कि घबराने की कोई जरुरत नहीं है क्योंकि गणेश रुद्राक्ष इन सभी समस्याओं का एकमात्र आसान उपाय है।

ज्योतिष के अनुसार पढ़ाई में सफलता के लिए बुध ग्रह का अनुकूल होना आवश्यक होता है। बुध ग्रह यदि अनुकूल हो तो व्यक्ति तीव्र बुद्धि से युक्त होता है तथा सामान्य प्रयास करने पर भी बेहतर परिणाम पा सकता है। गणेश रुद्राक्ष धारण करने से बुध ग्रह अनुकूल फल देने लगता है। गणेश रुद्राक्ष अध्ययन के प्रति एकाग्रता में वृद्धि करता है, स्मरण शक्ति बढ़ाता है तथा लेखन की शक्ति में भी वृद्धि करता है। इसके प्रभाव से सामान्य क्षमता वाला विद्यार्थी भी बेहतर परीक्षा परिणाम प्राप्त कर सकता है।

कैसे व कब धारण करें?

गणेश रुद्राक्ष धारण करने से पहले उसे गाय के कच्चे दूध तथा गंगाजल से धो लें तथा उसका पूजन करें। इसके पश्चात गणपतिअर्थवशीर्ष का पाठ करें। गणेश रुद्राक्ष को हरे रंग के धागे में धारण करें।

किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष मेंजिस बुधवार को सर्वाथसिद्धि योग बन रहा हो, उस दिन गणेश रुद्राक्ष पहनना शुभ होता है।



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बालों में भी छूपे होते हैं किस्मत और पैसों के राज, जानिए कैसे...



अगर आप जानना चाहते है कि आपकी किस्मत में पैसों का सुख कितना है? या ये जानना चाहते हैं कि आपके पास भविष्य में पैसा रहेगा या नहीं तो ये जानने का सबसे आसान तरीका है आपके बाल बस आइने में एक बार गौर से देखें, आप खुद जान जाएंगे कि आपकी किस्मत में क्या लिखा है।



मनुष्य के चेहरे को आकर्षक बनाने में बालों का अहम योगदान होता है। बाल सिर्फ चेहरे की सुंदरता ही नहीं बढ़ाते बल्कि मनुष्य के स्वभाव को भी व्यक्त करते हैं।

सामुद्रिक शास्त्र के अनुसार जातक के सिर में एक रोमकूप में एक बाल होना  ही शुभ होता है। ऐसे बाल ही उत्तम होते हैं। लेकिन यदि एक बाल में से कई शाखाएं निकली हों तो जातक की शक्ति कम करते हैं। ऐसे जातक दो विचारधाराओं के मध्य उलझे रहते हैं। किसी निर्णय तक नहीं पहुंच पाते जिससे सफलता नहीं मिलती।



- अगर आपके बाल पतले होते जा रहे हैं तो आपको आने वाले समय में जल्दी ही कोई बड़ा लाभ होने वाला है। ऐसे बाल वाले उत्तम स्वभाव, उदारता, प्रेम, दया, मृदुता, संकोच तथा संवेदनशीलता के प्रतीक होते हैं।

- इसके विपरीत अगर आपके बाल मोटे एवं कड़क होते जा रहे हैं तो आपको सावधान रहना चाहिए। ऐसे बालों वाले लोगों में उत्तम स्वास्थ्य एवं उच्च जीवनशक्ति होती है।

- अगर दिनों दिन आपक बाल सरल और सीधे होते जा रहे हैं तो आपको समझना चाहिए कि आने वाले समय में आपके सामने कोई नई योजना आने वाली है। ऐसे बाल आत्म संरक्षण, सरल स्वभाव, सीधी कार्य प्रणाली एवं स्पष्टवादिता के सूचक हैं।

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पंचक आज से: जानें क्या करें, क्या नहीं?




भारतीय ज्योतिष के अनुसार जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर रहता है तब उस समय को पंचक कहते हैं। यानी घनिष्ठा से रेवती तक जो पांच नक्षत्र (धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उतरा भाद्रपद एवं रेवती) होते है उन्हे पंचक कहा जाता है। कुछ विद्वानों ने इन नक्षत्रों को अशुभ माना है इसलिए पंचक में कुछ कार्य विशेष नहीं किए जाते हैं। इस बार पंचक का प्रारंभ 28 दिसंबर, बुधवार को रात के 8 बजकर 9 मिनिट से हो रहा है जो 2 जनवरी 2012, सोमवार शाम 4 बजकर 16  मिनिट तक रहेगा।

 नक्षत्रों का प्रभाव

धनिष्ठा नक्षत्र में अग्नि का भय रहता है।

शतभिषा नक्षत्र में कलह होने के योग बनते हैं।

पूर्वाभाद्रपद रोग कारक नक्षत्र होता है।

उतराभाद्रपद में धन के रूप में दण्ड होता है।

रेवती नक्षत्र में धन हानि की संभावना होती है।

पंचक में यह पांच कार्य न करें-

1-घनिष्ठा नक्षत्र में घास लकड़ी आदि ईंधन इकट्ठा नही करना चाहिए इससे अग्नि का भय रहता है।

2- दक्षिण दिशा में यात्रा नही करनी चाहिए क्योंकि दक्षिण दिशा, यम की दिशा मानी गई है इन नक्षत्रों में दक्षिण दिशा की यात्रा करना हानिकारक माना गया है।

3- रेवती नक्षत्र में घर की छत डालना धन हानि और क्लेश कराने वाला होता है।

4- चारपाई नही बनवाना चाहिए।

5- पंचक में शव का अंतिम संस्कार नही करना चाहिए। ऐसा माना जाता है कि पंचक में शव का अन्तिम संस्कार करने से उस कुटुंब में पांच मृत्यु और हो जाती है।

यदि परिस्थितीवश किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक अवधि में हो जाती है तो शव के साथ पांच पुतले आटे या कुश से बनाकर अर्थी पर रखें और इन पांचों का भी शव की तरह पूर्ण विधि-विधान से अंतिम संस्कार करें तो परिवार में इस दोष से और किसी की मृत्यु नही होती एवं पंचक दोष समाप्त हो जाता है।



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Sunday, December 25, 2011

सावधान बेडरूम में टीवी या कंप्यूटर तो रखें लेकिन इन बातों का ध्यान रखें..


गर आप बेडरूम में टीवी या कंप्यूटर भी रखना चाहते हैं तो सावधान हो जाएं। बेडरूम में टीवी या कंप्यूटर रखने से पहले कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें वरना आपको परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

वास्तु के अनुसार बेडरूम में वैसे तो कोई भी अतिरिक्त इलेक्ट्रानिक उपकरण नहीं रखना चाहिए। इन यंत्रों में खासकर टीवी, फ्रिज या कंप्यूटर आदि नहीं रखना चाहिए क्योंकि इनसे निकलने वाली हानिकारक तरंगे शरीर पर दुष्प्रभाव डालती हैं। वास्तु के अनुसार अधिकतर लोगों की शारीरिक परेशानियों का कारण भी यही होता है।

अगर बेडरूम में इलेक्ट्रानिक उपकरण रखना ज्यादा ही जरूरी है तो उन्हे आग्नेय कोण में रखें यानी पूर्व और दक्षिण दिशा के बीच के कोण में रखें। वास्तु के अनुसार कमरे में ये जगह इलेक्ट्रानिक उपकरणों के लिए सर्वश्रेष्ठ बताई गई है। इस जगह पर इलेक्ट्रानिक उपकरणों को रखने से स्वास्थ्य संबंधित परेशानियों से तो बचा ही जा सकता है साथ ही घर में बरकत और धन संबंधित परेशानियों से भी मुक्ति मिल जाती है।

अगर आप वास्तु के अनुसार कमरे के इस कोण में इलेक्ट्रानिक उपकरण नहीं रख सकते तो उसे कैबिनेट के अंदर या ढंककर रखें। जब टीवी न चल रहा हो तो कैबिनेट का शटर बंद रखें। इससे नींद अच्छी आती है और पति-पत्नी के वैवाहिक जीवन में सुख और शांति बनी रहती है।
 
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जानें, कैसे और किस मंत्र से दें सूर्य को अर्घ्य?


सांसारिक जीवन में सेहत, पैसा, सफलता, पद-प्रतिष्ठा या यश ऐसी इच्छाए हैं, जिनका एक-दूसरे से गहरा संबंध है। पैसे के अभाव में अच्छी सेहत बिगड़ जाती है, वहीं सेहत व पैसा के बिना सफलता मुश्किल हो जाती है। इसी तरह पद व यश के बिना सफलता सार्थक नहीं लगती है।

हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक सूर्य पूजा इन सभी कामनाओं को पूरा करने वाली होती है। व्यावहारिक रूप से भी सूर्य प्रतिदिन ऊर्जा ही नहीं बल्कि कर्म से संपन्न बनने की प्रेरणा भी देते हैं। यही कारण है कि सूर्य साक्षात देव के रूप में पूजनीय हैं।

शास्त्रों में सूर्य पूजा की शुरुआत सुबह सूर्य अर्घ्य के साथ किए जाने का महत्व बताया गया है। यही नहीं, सूर्य अर्घ्य से सुख-सफलता की कामना शीघ्र पूरी करने के लिये विशेष सामग्रियों व मंत्र असरदार माने गए हैं। जानते हैं विशेष

- रविवार को सूर्योदय से पहले जागकर सुबह तीर्थ या तीर्थ जल से स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहनें। मौन रहे व मन में पवित्र विचार रखें।

- तांबे के कलश में कुंकु म, लाल चंदन, लाल फूल डालकर सूर्य का हृदय में ध्यान करते हुए ऊँ खखोल्काय नम: बोलकर उदय होते सूर्य का आवाहन करें व नीचे लिखे मंत्र से अर्घ्य दें -

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पते।

अनुकम्पां हि मे कृत्वा गृहाणार्घ्य दिवाकर

- अर्घ्य के बाद नीचे लिखे मंत्र से सूर्य प्रार्थना करें -

अर्चितस्त्वं यथाशक्त या मया भक्तया विभावसो।

ऐहिकामष्मिकीं नाथ कार्यसिद्धिं ददस्व मे।

- बाद लाल आसन पर बैठ सिर ढंककर सूर्य देव की लाल पूजा सामग्रियों से  पूजा व आरती करें। सूर्य मंदिर या नवग्रह मंदिर में घुटने पर बैठ इन मंत्रों से सूर्य अर्घ्य दे सकते हैं।

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यह है देवताओं का स्थान, यहां न रखें कबाड़ा, नहीं तो..


वास्तु शास्त्र के अंतर्गत प्रत्येक दिशा व कोण का एक स्वामी होता है। उसी के अनुसार उस दिशा अथवा कोण का उपयोग किया जाता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार र्ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) देवताओं का स्थान माना गया है इसलिए इस स्थान का उपयोग बहुत ही सोच-समझकर करना चाहिए। ईशान कोण में निर्माण करवाते समय नीचे लिखी बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए-

1- ईशान कोण में यदि कोई कबाड़ा रखा हो तो उसे वहां से हटा दें। क्योंकि यह देवताओं का स्थान है। अगर यहां कबाड़ा रखते हैं तो अनिष्ट होने का भय रहता है।

2- प्रत्येक लिविंग रूम में ईशान कोण में भारी या अधिक सामान हो तो उसे कम करते हुए कमरे के नैऋत्य में सामान बढ़ा सकते हैं। ईशान कोण को खाली अथवा हल्का रखें।

3- यदि पूजा स्थल गलत दिशा में हो तो उसे ईशान दिशा में किया जा सकता है। उत्तर या पूर्व में पूजा स्थल हो तो उसे स्थानांतरित करने की आवश्यकता नहीं है।

4- यदि ईशान में शौचालय हो तथा घर में और भी शौचालय हो तो ईशान वाले शौचालय को बंद करवा दें।

5- औद्योगिक इकाइयों जैसे- फैक्ट्री, कारखाना आदि का ईशान कोण भी साफ-सुथरा होना चाहिए।



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चंद लम्हों का यह शिव मंत्र..सारी दिक्कतों का जल्द करे काम तमाम


हिन्दू धर्मशास्त्रों के मुताबिक त्रिदेवों में ब्रह्मदेव सृष्टि, विष्णु पालन तो शिव संहारक शक्ति के रूप में पूजनीय है। हालांकि त्रिदेव एक ही ईश्वर की तीन शक्तियां और कल्याणकारी स्वरूप माने जाते हैं। खासतौर पर शिव नाम का अर्थ और भाव ही कल्याण, शुभ और मंगल से हैं। जिसमें संकेत साफ है कि शिव नाम या भक्ति मन, वचन और कर्म में शुभ को स्थान देकर अशुभ से दूर ले जाते हैं।

शास्त्र कहते हैं कि शिव नाम बुरे भाव, विचार व इच्छाओं का अंत कर प्राणी को जगत के कल्याण का कारण बनाता है। शिव का तमोगुणी संहारक रूप भी असल में तामसी, पापी या बुरी शक्तियों का अंत कर कर धर्म व सद्गुणों का रक्षक है, जो जगत के लिए कल्याणकारी ही है। इसलिए वह शिव व शंकर यानी निराकार व साकार दोनों ही रूपों में वंदनीय है।

सांसारिक जीवन में भी अनेक अवसरों पर इच्छा या स्वार्थ के वशीभूत होने से हर इंसान के मन या विचारों में पैदा हुए दोष छोटी या बड़ी परेशानियों का कारण बनते हैं। शास्त्रों में बताए कुछ शिव मंत्र मन को पावनता से जोड़ सारी दिक्कतों का जल्द अंत करने वाले माने गए हैं।

खासतौर पर सोमवार या विशेष शिव तिथि पर यहां बताए जा रहे शिव मंत्र का स्मरण पाप व संकटनाशक माना गया है। सोमवार को शिव की सफेद चंदन, अक्षत, बिल्वपत्र, सफेद फूल के साथ दूध से बनी सफेद रंग की मिठाईयों का भोग लगाएं। धूप व दीप लगाकर नीचे लिखा शिव मंत्र बोलें व शिव की आरती कर कष्ट व संकटमुक्ति की कामना करें -

नमो रुद्राय महते सर्वेशाय हितैषिणे।

नन्दीसंस्थाय देवाय विद्याभकराय च।।

पापान्तकाय भर्गाय नमोनन्ताय वेधसे।

नमो मायाहरेशाय नमस्ते लोकशंकर।। 


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Friday, December 23, 2011

कल करें ऐसी शनि पूजा..नया साल होगा जबर्दस्त सफलताओं से भरा



शनिदेव दण्डाधिकारी माने गए हैं। उनका ऐसा चरित्र असल में, कर्म और सत्य को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देता है। जीवन में परिश्रम और सच्चाई ही ऐसी खूबियां हैं, जिन पर कठिन दौर में भी टिके रहना बड़ी सफलता व यश देने वाला होता है।

यही कारण है कि आने वाले कल को खुशहाल बनाने के लिए वर्तमान में कर्म में संयम और अनुशासन को अपनाने का संकल्प लेना अहम हैं। शुभ संकल्पों को अपनाने के लिए ही साल के अंत में बने शनिवार व अमावस्या तिथि के संयोग में शनि पूजा व उपासना आने वाले पूरे साल को दु:ख, कलह, असफलता से दूर रख सफलता व सुख लाएगी।

धर्मशास्त्रों व ज्योतिष विज्ञान में शनि पीड़ा या कुण्डली में शनि की महादशा, साढ़े साती या ढैय्या में शनि के अशुभ प्रभावों से बचाव के लिए शनि व्रत रखने का भी बहुत महत्व बताया गया है। चूंकि हर धार्मिक कर्म का शुभ फल तभी मिलता है, जब उसका पालन विधिवत किया जाए। इसलिए जानते हैं शनि अमावस्या के योग में व्रत पालन में स्नान, पूजा, दान और आहार कैसा हो?

स्नान -

शनि उपासना के लिए सबेरे शरीर पर हल्का तेल लगाएं। बाद में शुद्ध जल में पवित्र नदी का जल, काले तिल मिलाकर स्नान करें।

शनि पूजा -

शनिदेव को गंगाजल से स्नान कराएं। तिल या सरसों का तेल, काले तिल, काली उड़द, काला वस्त्र, काले या नीले फूल के साथ तेल से बने व्यंजन का नैवेद्य चढ़ाएं। 'ॐ शं शनिश्चरायै नम:' इस सरल शनि मंत्र का कम से कम 108 बार जप करें। तेल के दीप से शनि आरती करें।

दान -

शनि व्रत में शनि की पूजा के साथ दान भी जरूरी है। शनि के कोप की शांति के लिए शास्त्रों में बताई गई शनि की इन वस्तुओं का दान करें। उड़द, तेल, तिल, नीलम रत्न, काली गाय, भैंस, काला कम्बल या कपड़ा, लोहा या इससे बनी वस्तुएं और दक्षिणा किसी ब्राह्मण को दान करना चाहिए।

खान-पान -

शनि की अनुकूलता के लिए रखे गए व्रत में यथासंभव उपवास रखें या एक समय भोजन का संकल्प लें। इस दिन शुद्ध और पवित्र विचार और व्यवहार बहुत जरूरी है। आहार में दूध, लस्सी और फलों का रस लेवें। अगर व्रत न रख सकें तो काले उड़द की खिचड़ी में काला नमक मिलाकर या काले उड़द का हलवा खा सकते हैं।

any body who will try to steal or miss use or blog will be dealt severly acording to law

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Monday, December 19, 2011

पैसों की कमी डाले खुशियों में खलल तो बोलें यह हनुमान मंत्र



संत शिरोमणी गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित श्री हनुमान चालीसा की इस चौपाई 'अष्टसिद्धि नवनिधि के दाता, अस बर दीन जानकी माता।' संकटमोचक श्री हनुमान के शक्ति संपन्न होने के साथ ही संपूर्ण वैभव के स्वामी व दाता होना भी उजागर करती है।

यही कारण है कि श्री हनुमान उपासना न केवल तन व मन को सशक्त बनाने वाली बल्कि धन के अभाव से आने वाले सारे संकट व बाधाओं को भी टालने वाली मानी गई है।

अगर आप भी पैसों की कमी से सुखों को बंटोरने में मुश्किलों का सामना कर रहें हैं तो नीचे लिखे विशेष हनुमान मंत्र का स्मरण मंगलवार या शनिश्चरी अमावस्या के मौके पर जरूर करें -

- मंगलवार या शनिवार को स्नान के बाद श्री हनुमान मंदिर या शनि मंदिर में स्थित सिंदूर का चोला चढ़ी श्री हनुमान की प्रतिमा को सिंदूर, चमेली का तेल, फूल, अक्षत, जनेऊ व नैवेद्य चढ़ाकर नीचे लिखा हनुमान मंत्र लाल आसन पर बैठ सुख-समृद्धि की कामना से बोलें-

ऊँ नमो हनुमते रुद्रावताराय भक्तजनमन: कल्पना-कल्पद्रुमाय

दुष्टमनोरथस्तम्भनाय प्रभंजन-प्राप्रियाय

महाबलपराक्रमाय महाविपत्तिनिवारणाय

पुत्रपौत्रधन-धान्यादि विविधसम्पतप्रदाय रामदूताय स्वाहा

- मंत्र स्मरण के बाद श्री हनुमान की गुग्गल धूप व दीप से आरती कर प्रसाद ग्रहण करें। श्री हनुमान के चरणों से थोड़ा सा सिंदूर लाकर घर के द्वार या देवालय में स्वस्तिक बनाएं।

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सपने में जब दिखाई देने लगे गुलाब का फूल तो समझ लें कि...



ज्योतिष एक ऐसा विज्ञान है जिससे भूत-भविष्य और वर्तमान का सटिक अंदाजा लगाया जा सकता है। ज्योतिष के भी कई प्रकार हैं, जिनसे हम भविष्य में क्या होने वाला है? इस प्रश्न का उत्तर खोज सकते हैं। ज्योतिष के अंगों में से एक है स्वप्न ज्योतिष।
स्वप्न ज्योतिष के माध्यम से भविष्य में घटित होने वाले शुभ-अशुभ कार्यों की जानकारी मिलती है। प्राय: नींद में सपने सभी देखते हैं। कुछ सपने याद रह जाते हैं, कुछ याद नहीं रहते। जो सपने याद रहते हैं उनके आधार पर हम भविष्य के संबंध में अंदाजा लगा सकते हैं और यदि कोई अशुभ फल वाला स्वप्न हो तो उसका आवश्यक निदान किया जा सकता है।
कई लोगों को सपनों में गुलाब का फूल दिखाई देता है। स्वप्न ज्योतिष के अनुसार गुलाब फूल देखना काफी शुभ माना गया है।


- सपने में गुलाब दिखाई दे तो निकट भविष्य में ऑफिस में परेशानियां खत्म होंगी और कोई ऊंचा पद मिलने के योग बनेंगे। 
- घर-परिवार या मित्रों से कोई शुभ समाचार प्राप्त होगा। 
- व्यापार-व्यवसाय में पुराने नुकसान को पुरा करेंगे और अत्यधिक लाभ प्राप्त करेंगे। 
- आपके किसी दुश्मन से पुराने मतभेद दूर हो जाएंगे और वह आपका मित्र बन जाएगा।
- गर्भवती पत्नी का पति सपने में गुलाब देखे तो उसे पुत्र की प्राप्ति होने के योग बनेंगे।
- कोई स्त्री या लड़की सपने में गुलाब देखे तो अपने पति या प्रेमी से विवाद या समस्याएं समाप्त हो जाएंगी और प्रेम प्राप्त होगा।
- विवाहित स्त्री गुलाब देखे तो उसे ससुराल में मान-सम्मान मिलेगा।


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Sunday, December 18, 2011

जानें, क्यों रुद्राक्ष है साक्षात् शिव?







रुद्राक्ष शिव का साक्षात् स्वरूप माना जाता है। रुद्राक्ष दो शब्दों रुद्र और अक्ष से मिलकर बना है। जिसका सरल अर्थ ही है रुद्र यानी शिव के नेत्र। वहीं रुद्राक्ष शब्द के पीछे छुपी गूढ़ता जानें तो रुद्र का अर्थ है रुत् यानी दु:खों का नाश करने वाले वहीं अक्ष का अर्थ है आंखे यानी रुद्राक्ष शिव के नेत्रों से निकला पीड़ा हरण करने वाला है।

इस संबंध में शिव पुराण में लिखा भी है कि रुद्राक्ष की उत्पत्ति शिव के आंसुओं से हुई है। इसके अलावा भी अन्य पुराण रुद्राक्ष के शिव अंश होने की पुष्टि करते हैं। जानते हैं रुद्राक्ष के शिव का साक्षात् स्वरूप होने से जुड़े ऐसे ही  पुराण प्रसंग -

शिव पुराण के मुताबिक सती से वियोग होने से आहत शिव के आंसुओं की बूंदे जमीन जगह-जगह पर गिरने से रुद्राक्ष वृक्ष पैदा हुआ।

श्रीमद देवी भागवत् में उल्लेख है कि राक्षस त्रिपुर के नाश के लिये जब लंबे वक्त तक भगवान के नेत्र खुले रहे तो उनसे थकावट के कारण आंसू निकल भूमि पर गिरे। इससे ही रुद्राक्ष का वृक्ष प्रकट हुआ।

इसी तरह पद्मपुराण में लिखा है कि सतयुग में जब ब्रह्मदेव के वरदान से शक्तिसंपन्न बना दानवराज त्रिपुर जब पूरे जगत को पीडि़त करने लगा, तो देवताओं की प्रार्थना पर भगवान शंकर ने अपनी तेजस्वी दृष्टि से त्रिपुर का अंत किया। त्रिपुर से युद्ध के दौरान महादेव की देह से निकली पसीने की बूंदों से रुद्राक्ष के पेड़ की उत्पत्ति हुई।

रुद्र शिव का संहारक स्वरूप माना गया है। वहीं, वेद भी संपूर्ण प्रकृति को ही शिव का स्वरूप बताते हैं। इसलिए भी शिव के ही प्राकृतिक स्वरूप में रुद्राक्ष अनिष्ट, पाप व दु:ख नाशक माना गया है। यहीं नहीं, शिव उपासना की भांति रुद्राक्ष धारण करना भी कामनासिद्धि कर आयु, धन, वैभव, पुण्य और मुक्ति देने वाला माना गया है।


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इन जरूरी बातों का ध्यान रखें तो सिद्ध होगी हनुमान साधना



श्री हनुमान रामदूत और भक्त होकर भक्ति, सेवा, श्रद्धा और समर्पण की साक्षात् मूर्ति हैं। यही नहीं श्री हनुमान चरित्र पावनता और ब्रह्मचर्य व्रत के दृढ़ता से पालन कर सुखद जीवन जीने की प्रेरणा देता है। यही कारण है कि ब्रह्मचर्य से जुड़े पवित्रता, संयम और अनुशासन के भावों को अपनाना हनुमान भक्ति के लिए भी जरूरी बताया गया है।

वैसे श्री हनुमान रुद्र अवतार हैं, इसलिए माना जाता है कि शिव की भांति ही वह भी भक्ति और साधना के सरल उपायों से शीघ्र कृपा कर देते हैं, जो संकटमोचक और कामनासिद्धि करने वाली होती है।

हनुमान साधना की सिद्धि की लिये भी ऐसे ही सरल उपायों को यहां बताया जा रहा है। जिनका खासतौर पर मंगलवार, शनिवार और हनुमान उत्सवों की विशेष तिथियों पर जरूर पालन करना चाहिए -

- ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करें यानी तन, मन, विचार, वचन में पवित्रता व संयम रखकर ही हनुमान उपासना करें।

- हनुमान के मंत्र स्मरण लाल या पीले आसान पर रुद्राक्ष की माला से असरदार माने गए हैं।

- हनुमान को सुख की कामना से चमेली के तेल व संकटमोचन के लिये तिल के  तेल के साथ सिंदूर का चोला चढ़ाना शुभ फलदायी माना जाता है।

- केसर मिला लाल चंदन के साथ लाल फूल जैसे कमल, गुलाब आदि अर्पित कर पूजा करें।

- पवित्रता के लिये ही श्री हनुमान को गाय के शुद्ध घी से बना प्रसाद चढ़ाएं।

- खासतौर पर सुबह गुड़-चना, नारियल, दोपहर में गुड़-घी के लड्डू चूरमा व शाम को फल अर्पित करें। गुग्गल धूप व घी या चमेली तेल से दीप आरती करें।

- श्री हनुमान के नेत्रों की ओर दृष्टि रख मंत्र जप या स्तुति का पाठ करें और इतनी आस्था से करें कि आंखे बंद होने पर भी श्री हनुमान का स्वरूप मन-मस्तिष्क में मौजूद रहे और दिखाई दे।

- श्री हनुमान उपासना के बाद सिंदूर मस्तक पर जरूर लगाएं और प्रसाद ग्रहण कर मन में पवित्र कार्य और विचारों का संकल्प लें। श्री हनुमान को समर्पित जनेऊ, लाल मौली या काला धागा शरीर पर धारण करें।

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चाहते हैं होटल व्यवसाय में सफलता तो करें यह वास्तु उपाय


वास्तु शास्त्र से कोई भी निर्माण अछूता नही हैं। सभी प्रकार की ईमारतों पर चाहे वह आवासीय हो या व्यावसायिक वास्तु शास्त्र का प्रभाव पड़ता है। होटल व रेस्टोरेंट भी उन्हीं में से एक है। होटल व रेस्टोरेंट का निर्माण करवाते समय इन बातों का ध्यान रखें तो आपका होटल व्यवसाय चल निकलेगा नहीं तो नुकसान होने की संभावना भी रहती है-

1- आगन्तुकों के लिए स्वागत कक्ष होटल में घुसते ही उत्तर, पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में होना चाहिए।

2- होटल की छत पर पूर्व या उत्तर का भाग खुला रखें। जलपान के लिए छत का उपयोग किया जा सकता है।

3- भोजनालय (डाईनिंग हॉल) की व्यवस्था पश्चिमी क्षेत्र में करें।

4- यदि होटल के नीचे बेसमेंट बनवाना हो तो इसे उत्तर, पूर्व या ईशान में बनवाएं।

5- होटल के कमरे लंबे-चौड़े, हवादार व प्रकाशयुक्त हों तथा बाथरूम, डै्रसिंग रूम व बॉलकोनी आदि से युक्त हो।

6- स्वीमिंग पूल, तालाब, फव्वारे आदि उत्तर, पूर्व या ईशान कोण (उत्तर-पूर्व) में बनवा सकते हैं।

7- बॉलकोनी उत्तर या पूर्व में बनवाएं।

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चाहें धन व खुशियों में इजाफ़ा तो इस मंत्र से रोज करें पीपल पूजा



हिन्दू धर्मग्रंथों में कहा गया है कि 'हरि अनंत हरि कथा अनंता' इसमें ईश्वर की कण-कण में बसी शक्तियों, सर्वव्यापकता और स्वरूप की महिमा का गुणगान ही है। इसी आस्था को बल देती है- पीपल पूजा। हिन्दू धर्म में पीपल को देव वृक्ष माना जाता है।

आस्था है कि पीपल की जड़, मध्य भाग व अगले भाग में क्रमश: ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। इसकी शाखाओं व अन्य भागों में वसु, रुद्र, वेद, यज्ञ, समुद्र, कामधेनु के साथ ही अनेक देवी-देवताओं का निवास माना जाता है। इसलिए सांसारिक जीवन से जुड़ी हर कामनासिद्धि और दु:ख-दरिद्रता का अंत पीपल पूजा द्वारा संभव हो जाता है। पीपल पूजा ग्रह दोष शांति करने वाली भी मानी गई है।

श्रीमद्भगवद्गीता में भी भगवान ने इसे स्वयं का स्वरूप बताया है। इसे अश्वत्थ कहकर भी पुकारा गया है। यही कारण है कि देवमूर्ति की पूजा या मंदिर न जाने की दशा में पीपल पूजा कर लेना ही मलीनता, दरिद्रता दूर कर सुख, ऐश्वर्य व धन की कामना को पूरी करने वाला माना गया है।

इसके लिये सोमवार, विशेष वार, तिथियों या हर रोज़ भी विशेष मंत्र का ध्यान कर पीपल पूजा धन व सुख संपन्न रखने वाली मानी गई है। जानते हैं यह मंत्र विशेष व पूजा की सरल विधि -

- यथासंभव सूर्यादय के पहले जागकर स्नान के बाद सफेद वस्त्र पहन पवित्र स्थान पर स्थित पीपल वृक्ष की जड़ में गाय का दूध, तिल, चंदन मिला गंगाजल या कुंड, नदी का पवित्र जल अर्पित करें।

- पीपल वृक्ष में जनेऊ व फूल, नैवेद्य चढ़ाएं, धूप बत्ती व दीप जलाकर करीब ही आसन पर बैठ या खड़े रहकर भी नीचे लिखा मंत्र विशेष बोलते हुए त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु व महेश का स्मरण करें व तमाम परेशानियों से रक्षा की कामना करें-

मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।

अग्रत: शिवरूपाय वृक्षराजाय ते नम:।।

आयु: प्रजां धनं धान्यं सौभाग्यं सर्वसम्पदम्।

देहि देव महावृक्ष त्वामहं शरणं गत:।।

- मंत्र स्मरण के बाद त्रिदेव की आरती करें, प्रसाद ग्रहण करें व पीपल की जड़ में अर्पित थोड़ा सा जल घर में लाकर छिड़के। यह श्री व सौभाग्य वृद्धि करने वाला माना गया है।


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बनाना है सालभर के सारे लक्ष्य आसान..तो बोलें यह 1 खास हनुमान मंत्र


श्री हनुमान महायोगी और साधक भी हैं। श्री हनुमान के चरित्र के ये गुण संकल्प, एकाग्रता, ध्यान व साधना के सूत्रों से जीवन के लक्ष्यों को पूरा करने की  प्रेरणा देते हैं। इस संदेश के साथ कि अगर तन, मन और कर्म को दृढ संकल्प, नियम और अनुशासन से साध लिया जाए तो फिर कोई भी बड़ा या कठिन लक्ष्य  पाना बेहद आसान हो जाता है।

नई उमंग, उत्साह, ऊर्जा व आशाओं के साथ आने वाला नववर्ष भी बीते वर्ष की असफलता, निराशा को पीछे धकेल नए लक्ष्यों और सफलता की ओर बढऩे की प्रेरणा देता है। सालभर ऐसे ही लक्ष्यों को भेदने के लिये अगर शास्त्रों में बताए श्री हनुमान चरित्र के अलग-अलग 12 स्वरूपों का ध्यान एक खास मंत्र स्तुति से किया जाए तो साल के 12 महीने बहुत ही शुभ व मंगलकारी साबित हो सकते हैं।

जानते हैं धर्मग्रंथों में बताई यह खास हनुमान मंत्र स्तुति। जिसे मंगलवार, शनिवार या हनुमान उपासना के खास अवसरों के अलावा हर रोज सुबह या रात को सोने से पहले स्मरण करना न चूकें -

हनुमानञ्जनी सूनुर्वायुपुत्रो महाबल:।

रामेष्ट: फाल्गुनसख: पिङ्गाक्षोमितविक्रम:।।

उदधिक्रमणश्चैव सीताशोकविनाशन:।

लक्ष्मणप्राणदाता च दशग्रीवस्य दर्पहा।।

एवं द्वादश नामानि कपीन्द्रस्य महात्मन:।

स्वापकाले प्रबोधे च यात्राकाले च य: पठेत्।।

तस्य सर्वभयं नास्ति रणे च विजयी भवेत्।।

इस खास मंत्र स्तुति में श्री हनुमान के 12 नाम उनके गुण व शक्तियों को भी उजागर करते हैं । ये नाम है - हनुमान, अञ्जनी सूनु, वायुपुत्र, महाबल, रामेष्ट यानी श्रीराम के प्यारे, फाल्गुनसख यानी अर्जुन के  साथी, पिंङ्गाक्ष यानी भूरे नयन वाले, अमित विक्रम, उदधिक्रमण यानी समुद्र पार करने वाले, सीताशोकविनाशक, लक्ष्मणप्राणदाता और दशग्रीवदर्पहा यानी रावण के दंभ को चूर करने वाले।


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Friday, December 16, 2011

बुरी नजर से बचने के लिए घर के बाहर लगाना चाहिए काली मटकी...



कभी-कभी ऐसा होता है कि सबकुछ अच्छा चल रहा होता है और अचानक ही अच्छा समय बुरे समय में बदल जाता है। घर में क्लेश, अशांति और आर्थिक तंगी पैर पसार लेती है। परिवार में कोई सदस्य अचानक बीमार हो जाता है। ज्योतिष के अनुसार इस प्रकार के बुरे प्रभाव बुरी नजर के कारण हो सकते हैं। बुरी नजर से बचने के लिए घर के बाहर काली मटकी लगाई जा सकती है।

वैसे तो सभी को अपना घर सुंदर और अच्छा लगता हैं और इन सुंदर और आकर्षक घर को दूसरों की बुरी नजर भी लग सकती हैं। ऐसे में अधिकांश घरों पर काली मटकी लगी दिखाई देती है। यह मटकी क्यों लगाई जाती है?

काली मटकी लगाने के संबंध में ऐसी मान्यता है कि इसे लगाने से किसी की बुरी नजर आपके घर पर नहीं लगेगी। घर पर बुरी नजर लगने का मतलब घर में कुछ अमंगल हो सकता है, घर के किसी सदस्य के साथ कुछ अनहोनी हो सकती है। वहीं बुरी संभावनाओं से बचने के लिए घरों के बाहर काली मटकी लगाई जाती है।

बुरी नजर या ईष्र्या की भावना के साथ जब कोई आपके घर की ओर देखता है तो उस वक्त यह मटकी उस नजर को, उसके बुरे प्रभाव को अपनी ओर आकर्षित कर लेती है। जिससे आपके घर पर होने वाला बुरा प्रभाव वहीं समाप्त हो जाता है। इस प्रकार घर की ओर बढ़ रहे बुरे प्रभाव स्वत: नष्ट हो जाती हैं।



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हनुमान अष्टमी पर इन आसान उपायों से करें हनुमान पूजा



श्री हनुमान पावनता, संयम, शौर्य, पराक्रम, बुद्धि, बल, पवित्रता, संकल्प शक्ति के स्वामी हैं। श्री हनुमान की उपासना से ऐसी ही शक्तियों के बूते जीवन को कष्ट, बाधाओं व संकटों से मुक्त रखने के लिए मंगलवार और शनिवार के अलावा हिन्दू पंचांग के पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी, जो हनुमान अष्टमी के नाम से भी जानी जाती है, भी बहुत ही फलदायी मानी गई है।

आप भी हनुमान अष्टमी (18 दिसम्बर), शनिवार या मंगलवार जैसे हनुमान उपासना विशेष घड़ियों में यहां बताए छोटे-छोटे उपायों को अपनाकर जीवन में आ रही अनेक परेशानियों और बाधाओं से फौरन निजात पा सकते हैं-

- स्नान कर श्री हनुमान मंदिर में श्री हनुमान की पंचोपचार पूजा करें, जिसमें लाल गंध या चंदन, लाल फूल, लाल अक्षत अर्पित कर गुग्गल धूप व दीप से पूजा करें।

- श्री हनुमान को चमेली के तेल के साथ सिंदूर का चोला चढ़ाएं और लाल वस्त्र अर्पित करें।

- श्री हनुमान चालीसा, बजरंगबाण, हनुमान अष्टक का पाठ करें।

- श्री हनुमान की गुण, शक्तियों की महिमा से भरे मंगलकारी सुन्दरकाण्ड का परिजनों या इष्टमित्रों के साथ शिवालय में पाठ करें।

- शिव मंदिर में हनुमान मंत्र जैसे 'हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट्' का रुद्राक्ष माला से जप करें।

- श्री हनुमान को गुड़-चने, अनार या गेंहू के आटे-गुड़ से बने पकवानों का भोग लगाएं।

- पंचमुखी हनुमान के दर्शन कर चरणों में नारियल व यज्ञोपवित अर्पित कर उनके चरणों का सिंदूर मस्तक पर लगाएं।

- नियत संख्या जैसे 11, 21, 51 हनुमान मंदिर में श्री हनुमान के अलग-अलग स्वरूपों के दर्शन करें।



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शनिवार का राशिफल: अंक ज्योतिष के अनुसार कैसा रहेगा आपका दिन?



कैसा रहेगा आपके लिए दिन? मंगलवार के सितारों का मिजाज कैसा रहेगा आपके लिए? पढि़ए क्या है आपका  राशिफल..



अंक- 1 आपको कोई ऐसी खुशखबरी मिलेगी जो आपको बहुत खुश कर देगी। धन का लाभ होने का योग बनेगा। समाज में सत्कार होगा। शुभ रंग बैंगनी



अंक- 2 आपको आपकी योग्यता एवं प्रतिभा से ही सफलता प्राप्त होगी। सभी लोगों का सहयोग रहेगा। शुभ रंग पीला रहेगा।



अंक- 3 कोई महत्वपूर्ण निर्णय ना लें। मानसिक वेदना आपके व्यवहार में नजर आएगी। मित्र एवं परिजन वादा नही निभाएंगे। आपका शुभ रंग नीला रहेगा।



अंक-  4 कोई महत्वपूर्ण वस्तु आपके पास सेे गुम हो सकती है। सत्ताधारी शक्तियों से आपका संपर्क खराब हो सकता है। आपका शुभ रंग लाल।



अंक- 5 आप प्रसिद्ध व्यक्तियों के संपर्क में आएगें। आमदनी में इजाफा होगा। व्यापारियों को नये संपर्क से लाभ होगा। श्ुाभ रंग सफेद



अंक- 6 व्यय पर नियंत्रण रखें। परामनौवैज्ञानिक अध्ययन की और झुकाव होगा। कठोर वाणी आपको मुश्किल में डाल सकती है। आपका शुभ रंग हरा रहेगा।



अंक- 7 आपको इच्छाओं के विपरित परिणाम प्राप्त होंगे। घर में बीमारियों के पैर पसारने से परेशान होगे।शुभ रंग भूरा।



अंक- 8 आपको शरीर में दर्द से समस्या हो सकती है। रहस्यमय शक्तियों के प्रति रुचि होगी। जीवनसाथी से प्रेम बना रहेगा। शुभ रंग काला



अंक- 9 मित्र एवं सहयोगी आपकी मदद करेंगे। आमदनी में वृद्धि का योग बन रहा है। शत्रुओं का पराभाव होगा। आपका शुभ रंग आसमानी रहेगा।

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Wednesday, December 14, 2011

मुकद्दर संवारेगा गुरुवार को इस गुरु मंत्र का ध्यान




सनातन धर्म की प्रकृति को परब्रह्म का स्वरूप मानने वाली देव संस्कृति में ग्रह देव रूप में पूजनीय है। माना जाता है कि देव स्वरूप होने से हर ग्रह विशेष का अलग-अलग रूपों में शुभ प्रभाव सुख-सफलता लाने वाला होता है। जिसके लिए शास्त्रों में विशेष दिनों पर नवग्रह के विशेष मंत्रों के स्मरण का महत्व बताया गया है।

इसी कड़ी में बृहस्पतिवार को देवगुरु बृहस्पति के विशेष मंत्र ध्यान के शुभ प्रभाव से ज्ञान, बुद्धि, सुख-सौभाग्य, वैभव व मनचाही कामयाबी पाना आसान हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक बृहस्पति ने शिव कृपा से देवगुरु का पद पाया। इसलिए बृहस्पति उपासना शिव को प्रसन्न कर सांसारिक जीवन की कामनाओं जैसे विवाह, संतान, धन आदि को भी सिद्ध करती है।

कामनापूर्ति व भाग्य बाधा दूर करने के लिए ही यहां बताया जा रहा बृहस्पति मंगल मंत्र बहुत ही प्रभावी माना गया है। जानते हैं यह गुरु बृहस्पति मंत्र और पूजा की आसान विधि -

- गुरुवार को स्नान के बाद यथासंभव पीले वस्त्र पहन नवग्रह मंदिर में गुरु बृहस्पति की प्रतिमा को केसर मिले दूध व पवित्र जल से स्नान कराकर, पीले चंदन, पीले फूल या फूल माला, पीला वस्त्र, हल्दी से रंगी पीली जनेऊ, पीले फल, हल्दी, पीला अन्न व पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।

- गाय के शुद्ध घी का दीप व धूप बत्ती लगाकर यथासंभव पीले आसन पर बैठकर सुख-सौभाग्य की कामना से नीचे लिखे मंत्र का स्मरण कर आखिर में देवगुरु की आरती करें। मंत्र स्मरण व पूजा के बाद गुरु ग्रह से संबंधित पीली सामग्रियों जैसे पीली दाल, वस्त्र, गुड़, सोना आदि यथाशक्ति दान करें -



जीवश्चाङ्गिर-गोत्रतोत्तरमुखो दीर्घोत्तरा संस्थित:

पीतोश्वत्थ-समिद्ध-सिन्धुजनिश्चापो थ मीनाधिप:।

सूर्येन्दु-क्षितिज-प्रियो बुध-सितौ शत्रूसमाश्चापरे

सप्ताङ्कद्विभव: शुभ: सुरुगुरु: कुर्यात् सदा मङ्गलम्।।



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हमें हनुमान चालीसा का पाठ करना चाहिए, क्योंकि...



कलयुग में हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। श्रीराम के अनन्य भक्त श्री हनुमान अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वाले लोगों की हर कदम मदद करते हैं। सीता माता के दिए वरदान के प्रभाव से वे अमर हैं और किसी ना किसी रूप में अपने भक्तों के साथ रहते हैं।

हनुमानजी को मनाने के लिए सबसे सरल उपाय है हनुमान चालीसा का नित्य पाठ। हनुमानजी की यह स्तुति का सबसे सरल और सुरीली है। इसके पाठ से भक्त को असीम आनंद की प्राप्ति होती है। तुलसीदास द्वारा रचित हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है। इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं। जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती है और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है।

यदि आप मानसिक अशांति झेल रहे हैं, कार्य की अधिकता से मन अस्थिर बना हुआ है, घर-परिवार की कोई समस्यां सता रही है तो ऐसे में सभी ज्ञानी विद्वानों द्वारा हनुमान चालीसा के पाठ की सलाह दी जाती है। इसके पाठ से चमत्कारिक फल प्राप्त होता है, इसमें को शंका या संदेह नहीं है। यह बात लोगों ने साक्षात् अनुभव की होगी की हनुमान चालीसा के पाठ से मन को शांति और कई समस्याओं के हल स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए कोई विशेष समय निर्धारित नहीं किया गया है। भक्त कभी भी शुद्ध मन से हनुमान चालीसा का पाठ कर सकता है।



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घर के बाहर कौआं कांव-कांव करें तो समझ लें आएंगे मेहमान...




भारतीय शास्त्रों में शकुन और अपशकुन का गहरा महत्व बताया गया है। प्रतिदिन कई प्रकार की छोटी-छोटी घटनाएं होती हैं जो भविष्य में क्या होने वाला है यह बताती हैं। इन्हीं में से एक सामान्य घटना यह होती है कि आपकी घर की मुंडेर पर या छत पर कोई कौआं बोलता है तो ज्योतिष के अनुसार इसका भी कुछ मतलब होता है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यदि घर की मुंडेर पर कोई कौआं बोलता दिखाई तो समझना चाहिए कि आपके घर जल्दी ही मेहमान आने वाले हैं। यदि एक से अधिक कौएं मुंडेर पर बैठकर कांव... कांव... कांव... करें तो इसका मतलब यह है कि आपके घर में एक से अधिक मेहमान आने वाले हैं।

वहीं यदि सपने में भी कोई कौआं मुंडेर पर बैठकर बोलता हुआ दिखाई देता है तो इसके बहुत ही शुभ फल प्राप्त होते हैं।

कई लोग इसे अंधविश्वास मानते हैं लेकिन ऐसा अधिकांशत: ऐसा देखने में आता ही है कि जब भी किसी के घर पर कोई कौआं बोलता है तो मेहमान अवश्य ही आते हैं।




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Monday, December 12, 2011

इस 1 मंगल मंत्र से पूरे होंगे सुख के सारे अरमान



भगवान शिव मंगलकर्ता माने जाते हैं। इसलिए आस्था है कि शिव के स्मरण मात्र से ही महामंगल और शुभ हो जाता है। पौराणिक मान्यताओं के मुताबिक शिव का यही मांगलिक स्वरूप मंगल ग्रह के रूप में प्रकट हुआ। माना जाता है है कि शिव अंश या तेज के भूमि पर गिरने से मंगल ग्रह का जन्म हुआ। इसलिए मंगल देव भूमि के गर्भ से पैदा होने वाले और उसके द्वारा पालन-पोषण किए जाने से भूमिपुत्र या भौम नाम से भी पूजनीय है।

यही कारण है कि मंगल पूजा सांसारिक जीवन से जुड़ी तमाम कामनाओं जैसे विवाह, संपत्ति, सेहत, धन, दाम्पत्य, संतान, सफलता आदि सिद्ध करने वाली मानी गई है। इस तरह मंगल उपासना तन से पुष्ट, मन से साहसी व भूमि-संपत्ति व धन से समृद्ध बनाने वाली मानी गई है। मंगल देव भूमि, भार्या या पत्नी के रक्षक भी माने जाते हैं।

मंगलवार मंगल उपासना से जन्मकुण्डली में बने मंगल दोष शांति की भी शुभ घड़ी मानी जाती है। जिससे दाम्पत्य, विवाह और रक्त संबंधी समस्याएं पैदा होती है। इसलिए शास्त्रों में इस दिन विशेष मंगल मंत्र स्त्रोत बोलना इन दु:खों व परेशानियों से निजात दिलाने वाला माना गया है। जानते हैं यह मंगल स्त्रोत और सरल मंगल पूजा विधि -

- मंगलवार की सुबह स्नान के बाद लाल वस्त्र पहन नवग्रह मंदिर में मंगलदेव की प्रतिमा का लाल पूजा सामग्रियों जिनमें लाल चंदन, अक्षत, फूल, लाल वस्त्र व नैवेद्य शामिल हों, 'ऊँ अंकारकाय नम:' यह मंत्र बोल अर्पित करें। धूप, दीप लगाएं व लाल आसन पर बैठ नीचे लिखा छोटा-सा मंगल मंत्र स्त्रोत संकट, बंधनों से मुक्ति की प्रार्थना के लिये बोलें -

भौमो दक्षिणदिक्त्रिकोणयमदिग्विघ्रेश्वरो रक्तभ:

स्वामी वृश्चिक-मेषयो: सुरगुरुश्चार्क: शशी सौहृद:।

ज्ञोरिः षट् त्रिफलप्रदश्च वसुधा स्कन्दौ क्रमाद् देवते

भारद्वाजकुलोद्भव: क्षितिसुत: कुर्यात् सदा मंङ्गलम्।।

- मंगल मंत्र स्मरण के बाद मंगल देव की धूप, दीप आरती करें व यथासंभव गुड़, केसर मसूर दाल का दान किसी विद्वान ब्राह्मण को करें।




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Saturday, December 10, 2011

इस पत्थर से आप भी बन सकते हैं मालामाल



तंत्र शास्त्र में हकीक को चमत्कारीक पत्थर माना गया है। हकीक का प्रयोग विभिन्न टोटकों एवं प्रयोगों में किया जाता है। यह भी कहा जाता है कि जिसके घर में हकीक होता है, वह कभी गरीब नहीं हो सकता। हकीक पत्थर के कुछ साधारण प्रयोग इस प्रकार हैं-

- किसी शुक्रवार के दिन रात्रि में पूजा उपासना करने के पश्चात एक हकीक माला लें और एक सौ आठ बार ऊँ ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्मी वासुदेवाय नम: मंत्र का जप करें। इसके बाद माला को लक्ष्मीजी के मंदिर में अर्पित कर दें। धन से जुड़ी हर समस्या हल हो जाएगी।

- यदि ग्यारह हकीक पत्थर लेकर किसी मंदिर में चढ़ा दें और ऐसा कहें कि अमुक कार्य में विजय होना चाहता हूं तो निश्चय ही उस कार्य में विजय प्राप्त होती है।

- जो व्यक्ति श्रेष्ठ धन की इच्छा रखते हैं वह रात में 27 हकीक पत्थर लेकर उसके ऊपर लक्ष्मी का चित्र स्थापित करें, तो निश्चय ही उसके घर में अधिक उन्नति होती है

इस तरह यह पत्थर धन से जुड़ी आपकी हर समस्या का हल कर देता है



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Thursday, December 8, 2011

गर्भवती स्त्री को नहीं देखना चाहिए ग्रहण, क्योंकि...



शनिवार, 10 दिसंबर 2011 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण पड़ रहा है। हिंदू धर्म के अनुसार ग्रहण काल के संबंध में कई कार्यों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया गया है। इन्हीं वर्जित कार्यों में से एक है गर्भवती स्त्रियों द्वारा ग्रहण को देखना

विद्वानों और विज्ञान के अनुसार किसी भी गर्भवती स्त्री को घर से बाहर न निकलने की सलाह दी जाती है। ग्रहण काल के दौरान चंद्र से निकलने वाली किरणें हम पर बुरा ही प्रभाव भी डालती हैं। इन किरणों से बचना सभी के लिए जरूरी है, खासकर गर्भवती स्त्रियों के लिए। ऐसा माना जाता है यह किरणें गर्भ में पल रहे शिशु के लिए बहुत अधिक खतरनाक हो सकती हैं।
लुधियाना के ज्योतिषाचार्य Varinder Kumar JI  के अनुसार  इस काल में बुरी शक्तियां अत्यधिक बलशाली हो जाती है। यहां बुरी शक्तियां से आशय बुरी आत्माओं से है। यह शक्तियां गर्भ में पल रहे बच्चों के लिए तथा गर्भवती स्त्रियों के लिए भी अशुभ है। स्त्रियों के बाहर निकलने पर यह बुरी आत्माएं उन पर प्रभाव डालने का प्रयास करती हैं। जो कि काफी खतरनाक होता है। इसी वजह से गर्भवती स्त्रियों को ग्रहण काल के दौरान घर के अंदर रहने की सलाह दी जाती है। ग्रहण के समय वातावरण में नकारात्मक ऊर्जा सक्रिय रहती है जो कि कमजोर लोगों पर बुरा प्रभाव डालती है। गर्भवस्था के दौरान स्त्री का शरीर बहुत कमजोर हो जाता है। ऐसे में स्त्रियों इन बुरे प्रभावों से बचने के लिए घर में ही रहना जरूरी है। यदि ग्रहण के दौरान बाहर निकलना भी पड़े तो ध्यान रखें कि किसी भी परिस्थिति में सूर्य को न देखें और पूरी सावधानी रखना चाहिए।
 
 
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