Thursday, April 28, 2011

आपके लिए कितना शुभ है "महापद्म" कालसर्प योग





जिस व्यक्ति की कुंडली के छठे भाव में राहु और केतु बारहवें भाव में स्थित होता है और बचे हुए सात ग्रह इनके बीच में स्थित होते है तो उन लोगों की कुंडली में  महापद्म नाम का कालसर्प योग बनता है। इस योग कं कारण जातक अपने शत्रुओं को हराने वाला और उनका नाश करने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति हमेशा अपने शत्रुओं से जितने वाला होता है। इस तरह का कालसर्प योग जिन लोगों की कुंडली में होता है वैसे लोग विदेशों से व्यापार कर के लाभ कमाते हैं। लेकिन कभी कभी ज्यादा समय घर से बाहर रहने के कारण उसके घर में शांति का अभाव रहता है। इस कालसर्प योग के कारण जातक यात्रा बहुत करता है और उसे  बिजनेस से संबंधित यात्राओं में सफलता भी मिलती है। इस योग वाले जातक को एक ही चिज मिल सकती है धन या सुख। इस योग वाले लोगों को कई बार विश्वास पात्र लोगों से भी धोखा मिल जाता है इस वजह से उनके मन में निराशा की भावना पैदा हो जाती है। ऐसे लोग बहुत जल्दी अपने मन में शत्रुता पालकर रखने वाले भी होते हैं। कभी कभी ऐसे कालसर्प योग वाले जातक का चरित्र बहुत संदेहास्पद हो जाता है। उसके धर्म की हानि होती है। वह समय-समय पर  सपनों में संकेत भी मिलते हैं। उसकी वृध्दावस्था कष्टप्रद होती है। इतना सब कुछ होने के बाद भी इनके जीवन में एक अच्छा समय आता है उस समय इनको मान सम्मान और प्रतिष्ठा मिलती है। इस योग वाले अच्छे वकील या राजनीति के क्षेत्र में बहुत बड़ी सफलता पाने वाले नेता होते हैं।



क्या उपाय करें इस काल सर्पयोग वाले-

- श्रावणमास में 30 दिनों तक महादेव का अभिषेक करें।

- काले कपड़े पहन कर राहु बीज मंत्र की 18 या 3 माला जपें। उसके बाद एक बर्तन में जल, दुर्वा और कुश लेकर पीपल की जड़ में डालें।

- भोजन में मीठा चूरमा, मीठी रोटी समयानुसार रेवड़ी, तिल के बने मीठे पदार्थ सेवन करें और यही दान में भी दें।

- रात को घी का दीपक जलाकर पीपल की जड़ के पास रख दें।

- इलाहाबाद (प्रयाग) में संगम पर नाग-नागिन की विधिवत पूजन कर दूध के साथ संगम में प्रवाहित करें और तीर्थराज प्रयाग में संगम स्थान पर तर्पण श्राध्द भी एक बार जरूर करें।

- मंगलवार एवं शनिवार को रामचरितमानस के सुंदरकाण्ड का 108 बार पाठ श्रध्दापूर्वक करें।




Varinder Kumar
ASTROLOGER
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